sensex क्या होता है? sensex meaning के साथ जानियें सेंसेक्स क्या होता है की detail जानकारी
Sensex एक ऐसा शब्द जिसे हम newspaper या टीवी में कई बार सुनते है।लेकिन sensex क्या होता है? (what is sensex in hindi ) क्या आप जानते हैं? शेयर मार्किट में trading करने वाले लोग इसे भलीभांति जानते है। sensex के बढ़ने और घटने से उनपर काफी प्रभाव देखा जाता है? लेकिन आम इंसान या जो शेयर मार्किट को समझना चाहते है या इन्वेस्ट करने की इच्छा रखते है वह तो sensex के बारे में इतना कुछ नही जानते।
आज हम sensex क्या होता हैं? के इस आर्टिकल में sensex meaning को पूरी detail के साथ आप को बतायेंगे। साथ ही सेंसेक्स किस तरह से बनता है? शेयर मार्किट पर इस का क्या प्रभाव रहता है? और sensex क्या है के साथ साथ sensex से जुडी अन्य बातें जो जानने के लिए आप उत्सुक हैं उसका पूर्ण समाधान करेंगे।
Sensex क्या होता है? sensex meaning क्या है?
सीधे शब्दों में कहाँ जाएँ तो जिस तरह से exam के बाद रिजल्ट आता है और उस में कुल विषयों की औसतन वैल्यू को persentage (%) जैसे सुचनांक के द्वारा दर्शाया जाता है उसी तरह से शेयर मार्किट में शेयर्स की वैल्यू में होनेवाले उतार-चढाव को जिस सुचनांक से दर्शाया जाता है उसे sensex कहते है। जो शेयर बाजार में आनेवाली तेजी और मंदी के रुख को स्पष्ट करता है।
Sensex शब्द सब से पहला प्रयोग शेयर्स बाजार के प्रमुख एनालिस्ट दीपक मोहोनी द्वारा किया गया था। जो sensitive और Index इन दों शब्दों का कॉम्बो है। जिसे hindi में संवेदी सुचनांक भी कहाँ जाता है। जो प्रमुख रूप से बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) कि स्थिति को दर्शाता है। ताकि निवेशकों को बाजार का सही विश्लेषण हों और वह सही मूल्यमापन कर निवेश कर सकें। और अपने निवेश का पैटर्न खोज सकें।
Sensex का इतिहास
sensex meaning को समझने के लिए और sensex क्या होता है? यह जानने के लिए आप को sensex को बनाने के मुख्य उद्देश्य और इतिहास को जानना आवश्यक है।
भारत का सब से पुराना स्टॉक एक्सचेंज है बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज जिस की स्थापना सन 1875 में की गयी थी। लेकिन तब से लेकर सन 1986 तक बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का कोई आधिकारिक सुचनांक नहीं था। इसलिए किसी भी आधिकारिक तौर पर बाजार की स्थिति को दर्शाया नही जाता था। निवेशकों में एक विश्वासात्मक (trustable) स्थिति को create करने के लिए बाजार और BSE की स्थिति का सही आकलन होना जरुरी था। इसलिए 1 जनवरी 1986 को शेयर्स मार्किट के स्थिति का सही आकलन करने के लिए sensex को चुना गया जो शेयर्स बाजार के वास्तविक स्थिति को दर्शाने के साथ साथ बाजार की चाल को भी मेंशन करता है जिस से निवेशकों को शेयर मार्किट का सही मूल्यमापन कर बाजार की तेजी और मंदी का अंदाजा आ सकता है। जिस से शेयर्स मार्किट में एक विश्वासात्मक माहौल तयार होता है। जो पूंजी बाजार के स्वास्थ के लिए जरुरी है।
Sensex कैसे बनता है? Sensex को कैसे तैयार किया जाता हैं?
तो अब आप जरुर सोच रहे होंगे को sensex जो एक संवेदी सुचनांक है वह कैसे तैयार किया जाता है या इसे कैसे बनाया जाता है? तो अब हम जानते है की sensex कैसे बनता है या इसे कैसे तय किया जाता है?
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में हजारों कंपनियां लिस्टेड है। जिस से प्रमुख 13 सेक्टरों की एक श्रृंखला बनायीं जाती है। और उन प्रमुख 13 सेक्टरों में से mostly tops 30 कंपनियों को अलग चुना जाता है। क्यों की 13 सेक्टरों से चुनी गयी 30 कंपनियों के शेयर्स मार्किट में सब से ज्यादा ख़रीदे और बेचे जाते है। इसलिए इन कंपनियों के शेयर्स की वैल्यू को आधार बना कर स्टॉक एक्सचेंज इंडेक्स कमेटी द्वारा (sensex) सुचनांक का निर्धारण होता है।
स्टॉक एक्सचेंज इंडेक्स कमेटी में वित्तीय सलाहगारों के साथ, कई सरकारी अधिकारी, बैंक व्यवस्थापन से जुड़े कई लोग और कई तरह के अर्थशास्त्री होते है जो प्रमुख 13 सेक्टरों में से top 30 कंपनियों का चुनाव कर सभी 30 कंपनियों के शेयर्स की समीक्षा करते है।और ( sensex ) सुचनांक का निर्धारित करते है।
Top 30 कंपनियों को कैसे चुना जाता है?
आप के लिए यह जानना भी आवश्यक है की sensex के निर्धारण के लिए चुनी गयी कंपनियों को किस आधार पर चुना जाता है? और क्या हमेशा ही वही 30 कंपनियों को आधार बनाकर sensex का मूल्यमापन होता है? यह आम सवाल है जिस का जवाब आप को हम इस आर्टिकल में देंगे।
दोस्तों, sensex का निर्धारण करने के लिए स्टॉक एक्सचेंज कमेटी द्वारा बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में लिस्टेड हजारों कंपनियों को 13 सेक्टरों में बाटा जाता है और इस 13 सेक्टरों से मार्किट capitalization, performence , growth value के साथ साथ अन्य साधनों का विचार कर उन सभी कंपनियों से बेस्ट 30 का एक ग्रुप बनाया जाता है। जो अपने सेक्टर में लीडर कम्पनीयां होती है। इस 30 कंपनियों के ग्रुप को ब्लू चीप इंडिया कहाँ जाता हैं।
Sensex की वैल्यू के निर्धारण के लिए best 30 में शामिल की गयी कंपनियों के प्रति शेयर में होने वाले बदलाओं को औसतन अंक में दिखाता है जिसे हम sensex की वैल्यू या sensex का मूल्य कहते है। और वही पुरे शेयर मार्किट की sensex वैल्यू होती है जो इन best 30 कंपनियों पर निर्धारित होती है। जिनके शेयर्स मार्किट में ज्यादा से ज्यादा ख़रीदे और बेचे जाते है। इसलिए इसी तरह से इन कंपनियों के शेयर्स में उतार-चढाव के प्रभाव को हम sensex के घटने या बढ़ने के तौर पर देखते है।
Sensex का मूल मूल्य 100 अंक है और सन 1978-79 यह बेंज वर्ष तय किया है। वर्ष1990 के 25 जुलाई के दिन sensex मूल्य 1000 अंक तक पहुच गया था। और जब से हमारे देश ने आर्थिक उदात्तीकरण के धोरण का स्वीकार किया तब से आर्थिक गतिशीलता को बढ़ावा मिल गया और आज के समय में sensex मूल्य 51800 अंक के ऊपर ट्रेंड कर रहा है।
Sensex का घटना और बढ़ना किस पर निर्भर करता है?
आम तौर पर नयें निवेशकों के लिए ही नही बल्कि सभी निवेशकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण सवाल है। sensex का घटना या बढना पूर्णत: उन 30 कंपनियों के profit और loss को दर्शाता है। sensex के घटने और बढ़ने का सब से ज्यादा असर निवेशकों पर होता है। इसलिए यह जनानां महत्वपूर्ण है की sensex कैसे घटा और बढ़ता हैं?
शेयर मार्किट में लिस्टेड हजारों कंपनियों को 13 सेक्टर्स में बाटकर top 30 कंपनियों का ग्रुप बनाकर sensex का निर्धारण किया जाता है और उन tops 30 कंपनियों के परफॉरमेंस पर ही sensex घटता या बढ़ता है। यह उपरोक्त आर्टिकल में आप को बताया गया है और आप यह जान चुके है। लेकिन अब इस को विस्तार से जानते है की जो top 30 कंपनियों के परफॉरमेंस पर प्रभाव डालती है और जिस का सीधा असर sensex के मूल्य पर होता है।
राष्ट्रिय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आनेवाली विपदा या संभावित खतरों से top 30 कंपनियों के performence पर होनेवाले असर से sensex प्रभावित हो सकता है।
विदेशी बाजारों में होनेवाले उतार चढाव से top 30 कंपनियों को फायदा या नुकसान को देखते हुए भी sensex में तेजी या मंदी को हम देख सकते है।
Top 30 कंपनियों में कम्पनी द्वारा उठायें गये कदम भी sensex को प्रभावित करते है। यदि कोई कम्पनी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी प्रोजेक्ट को शुरू करती है तब कम्पनी के शेयर्स की कीमतों में बढ़ोतरी होती है जिस का सीधा असर sensex पर होता है।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति भी sensex को प्रभावित करती है। हमारे देश के अन्य देशों के साथ सम्बन्ध और व्यापारिक लेन-देन के समझौते कंपनियों के निवेश को बढ़ाते या घटाते है जिस का असर भी हम sensex के मूल्य पर देख सकते है।
सरकारी नीतियों में होनेवाले बदलाव और साथ ही रिज़र्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में किये जाने वाले बदलाव भी sensex पर असर करते है।
साथ ही घरेलु निवेशकों का रुख और निवेशकों के कारण लिस्टेड कंपनियों के तिमाही प्रदर्शन पर होनेवाले परिणामों से भी sensex में बदलाव देखे जा सकते है।
शेयर मार्किट में sensex का महत्व
किसी भी स्थिति को जानकर निकटम भविष्य के स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। जिस से हम आज के स्थिति को देख कर भविष्य में एक प्लानिंग के साथ कार्य कर सकें। लेकिन इस के लिए हमें स्थिति का आकलन होना आवश्यक होता है। और इसी आकलन के लिए हमें जरूरत होती है ऐसे माध्यम की जो हमें वर्तमान स्थिति की सटीक जानकारी दे पायें। और शेयर मार्किट में यही काम sensex करता है। जिस से निवेशकों को बाजार के स्थिति का सही आकलन होता है। जिस से निवेश करते वक्त सही आकलन से अच्छा decision ले सकें।
आप को यह जानकर हैरानी होगी की sensex देश के अर्थव्यवस्था के बदलाव का कारण भी हो सकता है। जिस का देश के अर्थव्यवस्था पर indirectly असर रहता है। इस में कुछ बाते आप के सामने स्पष्ट करना चाहता हूँ।
जब भी sensex की चाल को देखकर निवेशक अपने पैसे किसी कम्पनी में निवेश करते है तो उस कम्पनी के स्थिति में बदलाव आता है जिस से कम्पनी बेहतर परफॉरमेंस कर सकती है। अपने उत्पाद को बढाती है। जिस के लिए नए रोजगार का निर्माण होना स्वाभाविक होता है। जिस से देश में बेरोजगारी दर कम होने में मदद मिलती है। और साथ ही देश की अर्थव्यवस्था को चालना मिलती है।
बढ़ते sensex को देखकर निवेशकों में बाजार में निवेश करने का उत्साह बढ़ता है। और ज्यादा से ज्यादा भारतीय कंपनियों में होने वाले निवेश से जागतिक स्तर पर रुपयों की कीमतों मे मजबूती आती है और डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत होता है। जिस का सीधा असर घरेलु बाजार पर होता है। जिस से बहरी देशों से आनेवाले चीजें सस्ती होती है। और यदि sensex गिरता है तो निवेशकों में एक डर का माहौल तयार हो जाता है जिस से वह अपने शेयर्स को बेचना शुरू करते है। जिस से जागतिक स्तर पर भी इसका देखा जा सकता है। जो डॉलर के मुकाबले गिर जाता है।
उपरी निष्कर्ष से हम यही कह सकते है की sensex को हम भारतीय अर्थव्यवस्था के लीडिंग इंडिकेटर के रूप में देखा जा सकता है। यदि sensex बढ़ रहा है तो निकट भविष्य में भारतीय अर्थव्यस्था में उछाल देखा जा सकता है।
Sensex से जुडी top 31 कंपनियों के नाम
Sensex सम्बंधित कुछ सवाल
सेंसेक्स जितने पर क्लोज होता है दुसरे दिन उतने पर ही ओपन क्यूँ नही होता?
जवाब :- यह एक काफी अच्छा सवाल है। और सही तरह से पूछा भी गया है। यह एक सही बात है की आज की तारीख में sensex जींन अंकों पर क्लोज होता है, उन्ही अंकों से दुसरें दिन sensex शुरू नही होता। इस की सब से बड़ी वजह यह है की, आफ्टरमार्किट आर्डर के कारण ऐसा देखा जाता है।
शेयर मार्किट बंद होने के बाद भी शेयर्स के ऑर्डर्स होते है जो की बहुत लोग नही जान पातें। ऐसे aftermarket orders स्वीकृत तो हो जाते है लेकिन पूर्ण स्वकृति दुसरें दिन ही हो पाती है। जिस के कारण जिन आकंड़ों पर sensex क्लोज होता है उन्ही आंकड़ों पर ओपन नही होता।
Sensex का बढ़ना और घटना कौन निर्धारित करता है?
जवाब :- बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ( BSE) द्वारा सूचिबद्ध किये गये 31 कंपनियों के शेयर्स को एक सुचनांक द्वारा दर्शित किया जाता है। जिसे हम sensex के तौर पर जानते है। इन्ही 31 कंपनियों के शेयर्स में होनेवाले घटने और बढ़ने जैसे बदलावों को हम sensex के आंकड़ों में देख सकते है। जिस से पुरे शेयर्स मार्किट का रुख स्पष्ट होता है।
Sensex जीरो पर आ गया तो क्या होगा? क्या ऐसा संभव है?
जवाब :- वैसे देखा जाए तो असंभव ऐसा कुछ नही होता। बस ऐसे संभावनाओं को हम ऐसे केटेगरी में रख सकते है की ऐसा होने के चांसेस णा के बराबर हों। निकटतम भविष्य में तो इस बात की अभी कोई सम्भावना नहीं है। लेकिन sensex तेजी के साथ बढेगा या कितने तेजी के साथ गिरेगा। यह बताना यथा संभव ना मुमकिन है।
संबोधन
दोस्तों, sensex क्या होता है? (what is sensex in hindi ) के इस आर्टिकल में आप को sensex सम्बन्धी सभी जानकारी साँझा करने का मौका मिला। हम आप के लिए सीधे और सरल शब्दों में sensex की जानकारी पहुचना चाहते थे जिस से आप को sensex का सही अर्थ, परिभाषा समझाई जा सकें। हमारा यह प्रयत्न रहा है की इस सम्बन्धी ज्यादा से ज्यादा और सटीक जानकारी आप के सामने प्रस्तुत की जाएँ। आशा करता हूँ की आप को हमारा यह आर्टिकल पसंद आएगा। जो आप को sensex क्या होता है? इस की सटीक जानकारी देता है।


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