योग क्या है? और रोज के 25 मिनट के योगासन से कैसे बदल सकते है आपकी जिंदगी? yoga in hindi के इस Important Topic में…

 

yoga in hindi  में जानें क्यों आवश्यक हो गया है योग?

बेहतर और सार्थक जीवन को जीने के लिए शारीरिक एवं मानसिक संतुलन की आवश्यकता होती है। जिस के लिए हमें अपने जीवन में योग को अपनाना  चाहिए। yoga in hindi में जानेंगे रोज के 25 सेे 30  मिनट के योग से हम अपने जीवन में कई तरह के बदलाव ला सकते है। जानिए yoga in hindi में योग से जुड़ें शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक स्वास्थ के लाभ।

यदि हमारा शारीरिक, बौद्धिक और मानसिक स्वास्थ उत्तम है हो हमारे जीवन का हम अच्छे से लुफ्त उठा सकते है। लेकिन आज के दौर में खुद को शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक स्तर पर हम खुद को स्वस्थ रख पाने में सक्षम नही हो पा रहे है।

 

जिस के कारण हम जीवन के सब से बुरे दौर का अनुभव कर रहे है। आज जहाँ भौतिक सुखों के बावजूद हमारे भीतर कई तरह की चिंताएं व्याप्त है, तनाव से हम ग्रसित है, कई तरह की बिमारियों ने हमें जकड रखा है, हर चीज के प्रति उदासीनता के भाव मन में व्याप्त है। आज के दौर में हम शारीरिक स्वास्थ के साथ साथ मानसिक शांति को भी खो बैठे है।

इस के लिए हमें अपने दैनंदिन जीवन में योग को शामिल करने की जरूरत है। दैनंदिन जीवन में यदि हम 25 से 30 मिनट के योगाभ्यास को शामिल करते है तो हम अपने जीवन में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ से जुड़ें कई बदलाव कर सकते है। yoga in hindi के इस आर्टिकल में किस तरह से  हम 30 मिनट के योगाभ्यास से अपने जीवन को बदल सकते है यह जानेंगे।

yoga in hindi  में जानें… क्या है योग।

योग एक ऐसा सूक्ष्म विज्ञानं है जिसे अपनाकर हम शारीरिक और मानसिक स्वास्थ के साथ साथ भौतिक, सामाजिक तथा अध्यात्मिक प्रगति कर सकते है। हमारे संस्कृति से कई हजारों वर्षों से योग जुड़ा है। करीबन ३००० साल पहले महर्षि पतंजलि ने शुद्ध और सुचारू रूप से योगों का संकलन कर उन्हें योगसूत्र इस ग्रन्थ में सूचीबद्ध किया इसलिए महर्षि पतंजलि को योग के पितामह के रूप में जाना जाता है।

 

योगसूत्र में महर्षि पतंजलि ने योग की व्याख्या का विस्तार करते हुए योग की महत्ता का वर्णन किया है महर्षि पतंजलि कहते है की “मन की चंचलता को यदि अवरोधित कर मन या चित्त को वासना से अलग कर संयमित किया जाए तो चित्त कि शुद्धि होकर अनंत आनंद और शांति के मार्ग को खोज सकते है।” इसलिए महर्षि पतंजलि ने योग को चीत्त की वृत्तिओं के निरोध में परिभाषित करने का महान कार्य किया है।

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yoga in hindi में जानें … योग के प्रकार

महर्षि पतंजलि ने अपने योगसूत्र ग्रन्थ में योग के चार मुख्य प्रकारों का वर्णन किया है।

  1. मन्त्र योग

  2. हठयोग

  3. लययोग

  4. राजयोग

इन चारों प्रकारों के अतिरिक्त भगवान् कृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को अन्य तिन योग का कथन विस्तार से वर्णित किया है जिसे गीता में शब्दबद्ध किया है।

  1. ज्ञानयोग

  2. भक्तियोग

  3. कर्मयोग

मन्त्रयोग

चिंतन एवं मनन का कार्य हमारे मन के द्वारा ही संचालित होता है। लेकिन मन चंचलता के अधीन होने के कारण क्षणिक सुखों के लिए अशांति, तनाव जैसे मानसिक विकारों से पीड़ित है। मन की चंचलता को बांधकर मन को संयामित और एकाग्र करने के लिए  मंत्र या शब्द का एकाग्र ध्यान ही मन्त्र योग कहलाता है।

हठयोग

हठयोग में सूर्य और चन्द्र की अवस्थाओं का ध्यान होता है। हठयोग में शरीर में मौजूद  प्रमुख तिन नाड़ियों में पिंगला नाडी जो सूर्य की प्रतिक मानी जाती है और दूसरी इडा नाडी जो चन्द्र की प्रतिक मानी जाती है। इन दोनों नाडिओं से ध्यान के माध्यम से प्राण को श्रुशुम्ना नाडी में स्थापन कर समाधी अवस्था को प्राप्त किया जा सकता है।

 

योग शास्त्र में हठयोग के चार अंगों का वर्णन मिलता है। आसन, प्राणायाम, मुद्रा और बन्ध यह हठयोग के प्रमुख चार अंग है जिन्हें चौरांग मार्ग भी कहाँ जाता है। आज के समय में पश्चिमी देशों में हठयोग द्वारा साधना का प्रचलन काफी बढ़ गया है।

लययोग

कर्म की अवस्था में मन की चंचलता को निरोध करने के लिए ध्यान की प्रक्रिया को लययोग कहते है। अपने कर्मों को करते समय जैसे खाते,सोते,बैठते,उठते, समय कर्म से अलिप्त मन में ब्रम्ह का ध्यान ही लययोग कहलाता है।

राजयोग

राजयोग सभी योग में श्रेष्ठता प्राप्त है। राजयोग एक ऐसा योग है जो सभी योगों की विशेषताओं को धारण करता है। इसलिए इसे योगों में सर्वश्रेष्ठं कहाँ गया है। जिस के द्वारा मन को संतुलित, संयमित करना और मन की चंचलता तथा विषय वासना को निरोध करना आसान होता है।  राजयोग के आठ अंग महर्षि पतंजलि ने अपने योगसूत्र ग्रन्थ में वर्णित किये है इसलिए राजयोग को “अष्टांग योग मार्ग “ भी कहाँ जाता है।

yoga in hindi  में जानें …. राजयोग की अष्टांग योग प्रणाली

महर्षि पतंजलि द्वारा राजयोग में वर्णित अष्टांग योग प्रणाली को जानते है। जो काया, वाचा और मन को संयमित, संतुलित और एकाग्र करने के लिये काफी महत्वपूर्ण है। जिस के द्वारा हम मन को नियंत्रित, बुद्धि को विकसित और शरीर की स्वस्थता प्राप्त कर सकते है। जो हमारे सफल जीवन की कुंजी है।

अष्टांग योग प्रणाली के आठ सूत्र 

 

  • यम

  • नियम

  • आसन

  • प्राणायाम

  • प्रत्याहार

  • धारणा

  • ध्यान

  • समाधी

यम सूत्र :- काया, वाचा, मन को दुराचार से दूर रखना तथा काया, वाचा, मन से सत्य का स्वीकार करना योग के लिए जरुरी है। विषय वासना से मुक्त होना और अहम् को त्यागना ही योग के अष्टांग मार्ग के यम सूत्र में वर्णित है।

नियम सूत्र :- खुद के भीतर समर्पण को वर्णित करता अष्टांग मार्ग का नियम सूत्र  मन की पवित्रता, मन की संतुष्टि और मन में एकाग्रता के अध्ययन को भी वर्णित करता है।

आसन :-  चित्त की ठहेराव  की स्थिति के लिए और संतुलित स्थिति में चित्त के ध्यान के लिए बैठने की स्थिति को ही आसन कहाँ गया है।

प्राणायाम :- योग को साध्य करने के लिए अपनी सांसों पर आवश्यक नियंत्रण को प्राप्त करने हेतु अष्टांग योग मार्ग में प्राणायाम को आधार बताया है जो साँस के नियंत्रण के साथ मन की एकाग्रता को भी स्पष्ट करता  है।

प्रत्याहार :- अष्टांग योग मार्ग के प्रत्याहार सूत्र में विषयासक्त इन्द्रियों को मन के भीतर अंतर्मुख करने के लिए तथा काम,क्रोध, वासना को अपने मन के भावों से अलग करना ही योग साधना के लिए आवश्यक है।

 

धारणा :-  स्वयं में एकाग्रता को प्राप्त करने के लिए अष्टांग योग में धारणा के प्रभाव का वर्णन इस सूत्र में किया गया है।

ध्यान :- स्वयं के भितर स्वयं के द्वारा स्वयं का गहन चिंतन ही ध्यान कहलाता है। अष्टांग योग मार्ग में ध्यान का महत्व काफी ज्यादा है।

समाधी :- योग के परम प्राप्ति की स्थिति को वर्णित करती अष्टांग योग मार्ग के समाधी सूत्र में निशब्दता से साँस को ब्रम्हांड में स्थिर करने और अलौकिक चैतन्य स्वरुप को प्राप्त करने की अवस्था कहाँ गया है।

yoga in hindi में जानें ……श्रीकृष्ण उपदेशित गीता में योग

भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में तनावग्रस्त, नैराश्यसे ग्रसित, हतबल और हतोत्साहित अर्जुन को योग की शिक्षा देकर अपने कर्म पथ पर चलने के लिए प्रेरित किया और अर्जुन के मन में आत्मविश्वास को जगाया।

भगवान् कृष्ण द्वारा दिए गए उपदेशों में ज्ञानयोग, भक्तियोग और कर्मयोग की शिक्षा महर्षि वेदव्यास जी ने गीता में छंदबद्ध किया है। जो आज भी हमारे हतोत्साहित,नैराश्यसे ग्रस्त और तनाव से भरे जीवन को आत्मविश्वास की शिक्षा देती है।

 

ज्ञानयोग :- हमारे भीतर खुद को जानने की असीम इच्छा को ज्ञानयोग कहा गया है। स्व को स्व के माध्यम से जानकर स्व के अस्तित्व को ईश्वरीय संज्ञा के साथ जोड़ना ज्ञानयोग कहलाता है। जिस में मनुष्य के मन में विकार वासना तथा अहम् का नाश होकर असीम आनंद की प्राप्ति होती है।

भक्तियोग :– जीवन में आसक्ति ही सभी विकारों का मुल स्त्रोत होती है। आसक्ति विरहित जीवन के लिए भक्तियोग  का माध्यम सर्वश्रेष्ठ है। भक्तियोग द्वारा हम चित्त की निर्मलता को प्राप्त कर सकते है।

कर्मयोग :- किसी फल या आकांक्षा के बिना कर्म करने की योग्यता ही कर्मयोग कहलाता है। जो किसी भी आसक्ति के अधीन नहीं होता और ना ही किसी भय या चिंता से ग्रस्त होता है। कर्मफल के उद्देशों से प्रेरित कर्म दुःख, तनाव और नैराश्य को उत्पन्न करता है।

इसलिए जीवन में अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहकर कर्म फल से रहित कर्म को कर्मयोग कहाँ गया है जो आज भी सभी मानवजाति के लिए जीवन के भौतिकता से अलिप्त होकर जीवन क्रमण का एक अच्छा माध्यम है।

yoga in hindi में जानें ….. योग और योगासन में क्या है अंतर

काफी लोग योग और योगासन की स्थिति को समानता में तौलते है। योग और योगासन में भेद नही जान पाते और योगासन को ही योग की स्थिति समझते है। लेकिन दोनों में भिन्नता है। योग मन की चंचलता को निरोध कर मन में संतुलित और संयमित तौर पर नियंत्रण प्राप्त करता है जो मन में भावनाओं को स्थिर कर असीम आनंद की अनुभूति कराता है।

 

योग क्रिया में सुखपूर्वक स्थिति को निर्माण करना अथवा शरीर को आरामदेह स्थिति में ले जाना ही योगासन कहलाता है। राजयोग के अष्टांग मार्ग में सम्मिलित है। योग स्थिति में आरामदेह बैठने के स्थिति को भी योगासन कहाँ जाता है।

योगशास्त्र के अनेकों ग्रंथों में योगासन के अभूतपूर्व ऐसे लाभों का वर्णन किया है।

yoga in hindi में जानें …. योगासन के फायदे

अत्यंत सरल और सुलभ प्रक्रिया से हम योगासनों के अनेको फायदों को प्राप्त कर सकते है जिस के लिए ना तो हमें किसी के पास जाने की जरूरत नहीं और ना ही किसी वास्तु या विषय पर धन खर्च करने की भी आवश्यकता नहीं। और ना ही योगासन में छुत-अछूत, धनिक-निर्धन, सबल-दुर्बल या स्त्री-पुरुष जैसा कोई भी भेद नही है।

कोई भी व्यक्ति बड़ी सरलता से योगासनों को कर उसके अनन्य लाभ प्राप्त कर सकता है। नियमित रूप से योगासनों को कर हम कई तरह से मानसिक,  शारीरिक और बौद्धिक  क्षमताओं का विकास कर सकते है। आओ yoga in hindi में हम योग के अनन्य फायदों के बारे में जानेंगे।

  • योगासन से शरीर के सभी इन्द्रियों ( ज्ञानेन्द्रियों और कर्मेन्द्रियों ) का विकास होता है। योगासन शारीरिक दुर्बलता को नष्ट करता है और हमें शारीरिक और मानसिक बल प्रदान करता है।

  • योगासन से आँखों का तेज, श्वसनतंत्र को बल, स्नायु की मजबूती, धमनियों में रक्त प्रवाह में नियंत्रण, पेंट के आंतियो को आराम  मिलता है जिसे शरीर के सभी इन्द्रिय अपना काम सुचारू रूप से करते है जिस के कारण शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को काफी बढ़ावा मिलता है।

  • शारीरिक और मानसिक ग्लानी से हमारे भीतर तनाव की स्थित उत्पन्न हो जाती है। योगासन के नियमित अभ्यास से हम अपनी शारीरिक और मानसिक ग्लानी या थकान को बड़े आराम से दूर कर सकते है।

  • नियमित योगासन से हमारा पाचनतंत्र मजबूत होता है जिस के कारण पाचन सम्बन्धी जो विकार हमारे शरीर में उत्पन्न हुए है उन विकारों को हम योगासन द्वारा जड़ से ख़त्म कर सकते है।

  • शरीर में उत्पन्न दुखों को जैसे पीठदर्द, कमरदर्द, या जोड़ों में उठनेवाला दर्द हम योगासनों से आसानी से दूर कर सकते है। शरीर में महत्वपूर्ण रीड की हड्डी सम्बन्धी तकलीफों से हमें योगासन द्वारा छुटकारा मिल सकता है। नियमित योगासन से हम रीड की हड्डी को काफी लचीला बना सकते है।

  • योगासन से हम बड़े आसानी से शारीरक स्थूलता को ख़त्म कर सकते है। आज कल कई लोग मोटापे से काफी परेशान है। हम नित्य योगासन के अभ्यास से मोटापे को कम कर सकते है।

  • योगासन स्त्रियों के लिए काफी लाभदायी होता है। नियामित तौर पर योगासन का अभ्यास स्त्रियों के सुन्दरता को काफी निखरता है। चेहरे को ताजिला और आकर्षक बनाने के लिए भी योगासन काफी महत्वपूर्ण है।

  • शारीरिक स्वस्थ के साथ साथ योगासन हमारे मन और बुद्धि के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है।  मन में उठे आकस्मिक डर, तनाव, वैफल्यता से ग्रस्तता और निराशा को दूर करने के लिए हमें योगासनों की काफी मदद हो सकती है।

  • योगासन से बुद्धि का विकास बड़े तेजी से होता है। इसलिए विद्यार्थी दशा में योगासन का अनन्य साधारण महत्त्व होता है।नियमित योगासन के अभ्यास से कल्पनाओं का काफी विस्तार होता है और आत्मबल या आत्मविश्वास में काफी बढ़ोतरी होती है।

  • योगासन और योग के हमारे जीवन में कई सारे फायदे होते है। आप को शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, या अध्यात्मिक रूप से जो भी परेशानी है। वह हम योग और योगासन से दूर कर सकते है।

yoga in hindi में  जानें ….. योगासन के पूर्व रखें इन बातों का ध्यान

योगासन के अभ्यास को असरदार और लाभदायक बनाने के लिए हमें कुछ बातों का ध्यान रखना जरुरी है। काफी लोग यह कहकर योगासनों का अभ्यास छोड़ देते है की उनको योगासनों के अभ्यास से कुछ भी लाभ नही हुआ। लेकिन वह योगासनों के नियमों को तथा ध्यान में रखने वाली बातों को नजरंदाज कर देते है। और कभी  गलत तरीकों को अपनाते है जिस से उन्हें योगासनों के अभ्यास का लाभ नही मिल पाता। yoga in hindi के इस आर्टिकल में हम योगासनों के अभ्यास के दौरान नजरअंदाज ना किए जाने वाली बातों को जानते है।

 

  • योगासनों का अभ्यास हमें शुद्ध वातावरण में ही करना चाहिए। अगर हम अपने घर में एक कमरे में योगासन का अभ्यास करते है तो यह सुनिश्चित करें की कमरे में हवा का अच्छे से आवागमन हो सकें।

  • योगासनों के अभ्यास के लिए सूर्योदय के पूर्व का समय सब से बेहतर मन जाता है। इस लिए हमें सूर्योदय के पूर्व अपने नित्यकर्मों को पूर्ण कर कर( स्नान, शौच आदि ) शुद्ध और प्रसन्न मन से ही योगासनों का अभ्यास शुरू करना चाहिए।

  • योगासनों के अभ्यास के दौरान शरीर में केन्द्रित होने वाली उर्जा को संकलित करने के लिए हमें भूमि पर साफ़ सूत्रे आसन को बिछाकर ही योगासन करना चाहिए।

  • योगासन यह आसानी से करने वाली एक क्रिया है। इसके करते समय हमें किसी भी तरह से शारीरिक या मानसिक जोर या जबरदस्ती योगासन नही करना चाहिए।

  • योगासन की शुरवात करने से पहले हमें शारीर की उर्जा को actived करना जरुरी है इस के लिए हम योगासन का अभ्यास शुरू करने से पहले थोडा worm up भी कर सकते है।

  • योगासन करने के पूर्व और उसके उपरांत भी थोडा शरीर को आराम दें। योगासन के तुरंत बाद किसी कार्य में ना लग जाएँ ।

  • स्त्रियों के लिए जरुरी है की मासिक धर्म के दौरान और गर्भावस्था में योगासन नही करने चाहिए।

  • किसी बीमारी में अथवा गंभीर स्वरुप के रोगों के दौरान हमें योगासनों को नही करना चाहिए।

  • योगासन करते समय शारीरिक ढिलाई के अनुरूप ही वस्त्रों को पहनना चाहिए।

  • योगासन की क्रिया को हमें अपने दैनंदिन जीवन में शामिल करना चाहिए। एक या दो बार करने से हमें योगासन के  लाभ नही मिल पाएंगे।

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महिलाओं के लिए आसन

महिलाएं अपने चेहरें को निखारने के लिए, सुन्दर काँती की प्राप्ति के लिए काफी कुछ करती है। कई तरह के creams और ब्यूटी पार्लर को आजमाती है। लेकिन फिर भी कुछ दिनों बाद उनकी काया जैसी की वैसी हो जाती है। महिलाओं को अपने चेहरे को निखारने के लिए योगासन का अभ्यास काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।

सर्वांग पुष्टि आसन, सर्वांगासन और शीर्षासन जैसे योगासन महिलाओं को जरुर करने चाहिए जिस से महिलाओं की निस्तेज कान्ति में काफी तेज और निखार आता है  और साथ ही उनकी शारीरिक और मानसिक सुन्दरता भी बढती है।

सर्वांग पुष्टि आसन

सब से पहले समतल भूमि पर एक साफ आसन बिछाएं और आसन पर दोनों पैर फैलाकर खड़े हो जाए और अपने दोनों हाथों की मुट्ठी को इस तरह से बंद करें की हाथों का अंगूठा दिखाई ना दें या अन्गुठें को मुट्ठी के अन्दर बंद करें।  अब दोनों हाथों के साथ शरीर को बाएं पैर की और झुकाएं और बाएं टखने के पास बाएं हाथ को रख कर उस की कलाई पर अपने दाहिने हाथ की बंद मुट्ठी रखें। और साँस भरते भरते अपने हाथों को उठाकर दाहिने टखने की और लें जाएँ और दाहिने टखने पर दाहिने हाथ को रख कर उसके कलाई पर बाएं हाथ की मुट्ठी रखें और साँस छोड़े। इस एक बार की प्रक्रिया को 90 सेकंड तक करें।

yoga in hindi
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सर्वांगासन

सर्व प्रथम समतल भूमि पर आसन बिछाकर सीधे पीठ के बल लेट जाएँ और फिर अपने पैरों को आपस में जोड़ कर सीधा कर लें। इस के बाद एक लम्बी साँस लें और अपने दोनों पैरों को एकसाथ धीरे धीरे उठाये। पैरों को धीरे धीरे ऊपर की और उठाते उठाते अपनी कमर और पेट को अपनी छाती तक ऊपर उठायें।

 

इस दौरान अपनी हाथों की कोहनियो को मोड़कर अपने हाथ कमर पर रखें और हाथों के बल अपनी कमर को ऊपर उठायें। इस दौरान आप के कंधे से लेकर कोहनी तक का भाग जमीं पर टिका रहेगा और आप के पैरों की स्थिति ऊपर की और उठी रहेगी। और शरीर का सारा वजन आप के कन्धों पर आ जायेगा। सर्वांगासन का अभ्यास करते समय अपने सांसों की गति को सामान्य रखें। और इस अवस्था में खुद को कम से कम 25 सेकंड तक बनायें रखें।

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शीर्षासन

समतल भूमि पर आसन बिछाकर अपने दोनों घुटनों पर बैठ जाएँ। अब शीर्षासन की स्थिति के लिए अपने हाथों को ( कोहनी से हथेली तक ) जमीन या अपने आसन पर टीकाएँ। और अपने सिर को अपने दोनों हाथों के बिच में लायें। और पैरों को जमीन पर टीका कर मध्य शरीर को ऊपर उठायें जो उलटे V की स्थिति होगी।

अब धीरे धीरे अपने पैरों को आसन से ऊपर की और उठाये। और अपना पूरा वजन अपने सिर पर डालें। अपनी पीठ को सीधा रखें और सिर के बल उल्टा खड़ें हो जाएँ।  कम से कम 20 से 30 सेकंड तक इस स्थिति में रहें। इस दौरान आप को सामान्य स्थिति में साँस को लेना और छोड़ना है।  शीर्षासन करने के लिए आप दिवार का भी सहारा ले सकते है।

 योगासनों में सर्वश्रेष्ठ प्रक्रिया है सूर्यनमस्कार

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सूर्यनमस्कार योगासनों की सर्वश्रेष्ठ प्रक्रिया मानी जाती है जिसे संसार का हर छोटा- बड़ा, आमिर-गरीब, बच्चे, जवान, बुढ़ें, स्त्री, पुरुष कोई भी कर सकता है। सूर्यनमस्कार से हमारे immunity system काफी गहरा प्रभाव पड़ता है। नित्य सूर्यनमस्कार के अभ्यास से हम हमारी रोग प्रतिरोधक शक्ति को काफी मजबूत कर सकते है।  जिसे हम Bacterial infection  और  viral infection से खुद को दूर रख सकते है।
कोरोना जैसी आपदा में सूर्यनमस्कार हमारे लिए एक प्रभावी आसन सिद्ध होता है जो हमारे रोग प्रतिरोधक क्षमता को काफी बढाता है। 

सूर्यनमस्कार 12 योगासनों का समूह होता है जिस की आर एक स्थिति एक आसन है। सूर्यनमस्कार में भगवान सूर्य के 12 नाम मन्त्रों से 12 आसन किये जाते है। चित्र में दिखाई गये 12 स्थितियों के साथ सूर्य देवता के 12 मन्त्रों के उच्चारण से हम सूर्यनमस्कार का अभ्यास कर सकते है।

अनु.क्र. आसन नाम मंत्र
1. प्रमाणासन ॐ मित्राय नम
2. हस्त उत्तानासन ॐ रवये नम:
3. उत्तानासन ॐ सूर्याय नम:
4. अश्व संचलानासन ॐ भानवे नम:
5. चतुरंग दण्डासन ॐ खगाय नम:
6. अष्टांग नमस्कार ॐ पूष्णे नम:
7. भुजंगासन ॐ हिरन्यगर्भाय नम:
8. अधोमुक्त श्वानासन ॐ मरीचये नम:
9. अश्व संचालनासन ॐ आदित्याय नम:
10. उत्तानासन ॐ सवित्रेय नम:
11. हस्त उत्तानासन ॐ अर्काय नम:
12. प्रमाणासन ॐ भास्कराय नम:

 


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पद्मासन

पद्मासन एक ध्यान मुद्रा का आसन है जिसे कमल आसन और बौद्ध भिक्शुयों द्वारा वज्रासन भी कहाँ जाता है। पद्मासन ध्यान मुद्रा के लिए काफी फायदेमंद होता है इस में ध्यान की स्थिति में बैठने के लिए समतल भूमि पर आसन बिछोकर दहिंने घुटने को मोड़कर बाही जांघ पर रखा जाता है और वही स्थिति बाहे घुटने को दहिने जांघ पर रख कर दोहराते है। जिसे हमारे पैरों की एडियाँ हमारे नाभि के समीप आती है। पद्मासन की स्थिति में हम अपने सिर और रीड की हड्डी को सीधा रखते है।

पद्मासन की स्थिति में ध्यान लगाने से हम कुछ ही देर में शरिर के अन्दर काफी उर्जा को महसूस कर सकते है। पद्मासन की स्थिति में हम चिन्मयी मुद्रा और ब्रम्ह मुद्रा को अपनाकर अपने ध्यान में काफी गहेराई ला सकते है।

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हलासन

उम्र के बढ़ने साथ साथ हमारी रीढ़ के हड्डी में काफी कठोरता आती है जो उम्र बढ़ने के साथ हमें कमरदर्द की तकलीफ को बढ़ा देता है। इस के लिए हमें अपने दैनंदिन जीवनशैली में हलासन करना चाहिएं। नियमित हलासन हमारे रीड के हड्डी को काफी लचीला बना देता है। हलासन का नियमित अभ्यास हमारे नाड़ीतंत्र को शुद्ध और मजबूत करता है जिस से नदियों के स्वास्थ की रक्षा होकर वृद्धावस्था जल्द नही आती। और ऐसे अनेकों फायदे हलासन से हमें प्राप्त होते है।

साफ सुतरे आसन पर अपने हाथों को अपने बगल में रख कर आसन पर पीठ के बल लेट जाएँ। अब धीरे धीरे साँस लेते और छोड़ते अपने पैरों को ऊपर की और उठायें  जिसे समतल भूमि और आप के पैरों में 90 डिग्री का कोण तैयार हो। अब धीरे धीरे अपने पैरों को अपने सर के ऊपर से ले जाकर भूमि पर टीकाएँ या जहा तक आप अपने पैरो को ले जा सकते है वहां तक लें जाएँ। और इस स्थिति में लगभग ४० से ५० सेकंड तक आराम करे और बाद में पूर्ववत स्थिति में आयें।

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वज्रासन

योगभ्यास के आसनों में वज्रासन एकमात्र ऐसा आसन है जो हम भोजन के बाद भी कर सकते है। इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर कठोर और मजबूत होता है वज्र के सामान होता है इसलिए इस आसन को वज्रासन कहते है। इस आसन से उदराग्नि प्रज्वलित होकर पाचनतंत्र को सहाय्यक होती है जीस कारण पेट सम्बन्धी विकारों से छुटकारा मिलता है।

 

वज्रासन करने के लिए समतल भूमि पर साफ सूतरा आसन बिछाकर उसपर घुटनों के बल बैठ जाएँ। इस दौरान अपने दोनों पैरों के अन्गुठें एकसाथ जोड़े किन्तु अपने पैरों के एडियों को थोडा दूर रखें। और धीरे धीरे अपने नितम्बों को अपने एडियों पर टीकाएँ और आरामदेह स्थिति में बैठ जाएँ। और अपने हाथों को अपने घुटनों पर टीकाएँ इस दौरान रीड की हड्डी को, पीठ को और अपनी गर्दन को सीधा रखें।

इस तरह से 10 से 15 मिनट की स्थिति में बैठे रहें। इस दौरान आप  सामान्य रूप से साँस को लेते रहे और अपनी आखें बंद रखें या फिर इस दौरान आप अवलोम विलोम या कपालभाती जैसे प्राणायामों को कर सकते है।

yoga in hindi में जानें ……प्राणायाम के प्रकार

अष्टांग योग सूत्र में आठ सूत्रों में से प्राणायाम एक महत्वपूर्ण सूत्र है जो योग क्रिया कभी एक अत्यंत जरुरी और आवश्यक अंग होता है।” प्राण याने साँस और आयाम याने विस्तार करना”  अपनी सांसों की गति को विस्तार देकर दोनों सांसों के अंतर को बढ़ाना और अपने साँस के गति पर नियंत्रण करना ही प्राणायाम कहलाता है। जो शारीर में प्राण शक्ति को विस्तार देती है तथा जीवन शक्ति को एक नै उर्जा प्रदान करती है।

योगाभ्यास में कई तरह के प्राणायामों को किया जाता है  जिस के कुछ मुख्य प्रकार इस तरह से है।

  • भस्त्रिका प्राणायाम

  • बाह्य प्राणायाम

  • कपालभाती प्राणायाम

  • अनुलोम- विलोम प्राणायाम

  • भ्रामरी प्राणायाम

  • उद्दिग्थ प्राणायाम

  • प्रणव प्राणायाम

  • उज्जायी प्राणायाम

  • सीत्कारी प्राणायाम

  • शीतली प्राणायाम

  • चंद्र्भेदी प्राणायाम

  • सुर्यभेदी प्राणायाम

  • अग्निसार क्रिया

yoga in hindi की कुछ बातें ……

हमारे दैनंदिन जीवन में हमें अपने स्वास्थ पर अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है। हमारा शरीर बहुमूल्य होता है उस का किसी भी चीज से मोल नही लगाया जा सकता। इसलिए हमे अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए शारीरिक स्वास्थ के लिए जरुर कुछ करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। इसलिए योगासनों के साथ साथ हमें नित्य कुछ समय प्राणायामों को भी देना चाहिए।

 

कई तरह के लोग आप को कई तरह से अलग अलग आसनों के अलग अलग फायदे बताएँगे। और उनकी बातों में सच्चाई भी होती है किन्तु मेरा यह अनुभव रहा है की आप किसी भी तरह के आसनों को यदि दैनंदिन रूप से अपनी जीवनशैली बना लेते है और रोजाना  कुछ समय योगाभ्यास के लिए देते है तो आप को कई तरह से लाभ प्राप्त होते है।

यकीनन योगाभ्यास से शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ में काफी लाभ होते है। अखंडित योगाभ्यास से आप की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी बढ़ जाती है जिस से आप कई तरह के रोगों से खुद को आसानी से बचा सकते है। शरीर में हिमोग्लोबिन की कमी होना, ब्लड प्रेशर का बढ़ना, ह्रदय विकार जैसी समस्या के लिए हमें योग को जरुर अपनाना चाहिए। यक़ीनन यह हमारे लिए काफी फायदेमंद होता है।

यह जरुरी नहीं की आप योगाभ्यास के किस आसनों को अपनाते है जरुरी यह है की आप किसी आसनों और प्राणायामों का अभ्यास करें आप को इसका निश्चित ही लाभ होगा।


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