चिंता मुक्त कैसे रहे। Ways to stay away from anxiety and stress
जीवन में हमारे परिवार की , हमारे सगे संबंधियों की , हमारे दोस्तो की, हमारे अपनों की अपेक्षाओं पर खरे उतरते उतरते जीवन में चिंताओं का बढ़ जाना स्वाभाविक तो है किन्तु उन चिंताओं का बोझ इतना बढ़ जाता है कि हम Depression में जाने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए चिंता मुक्त कैसे रहे इस बात पर मंथन आवश्यक है।
चिंताओं का बोझ क्या होता हैं? चिंताएं किस प्रकार मन में उदासीनता का भाव निर्माण करती है? ज्यादा सोचने से मन में किस तरह तनाव निर्माण होता है? चिंतामुक्त होने के लिए हमें क्या करना चाहिए? और हम चिंता मुक्त कैसे रहे ? ( Ways to stay away from anxiety and stress ) आओ ये सब जानते है, समझते है।
चिंताओं का बोझ क्या होता है। और चिंता मुक्त कैसे रहे
रोजमर्रां की जीवन में छोटी छोटी बातों से लेकर भविष्य के सपनों तक जीवन चिंता से ग्रस्त है। खुदके और अपनों का सुख ढूंढ़ने में जीवन का अधिक समय चिंताओं से ग्रस्त रहता है। धीरे धीरे मन में विचारों चक्र बढ़ता जाता है।हम किसी काम पर ध्यान नहीं लगा पाते। मैं की उदासीनता बढ़ती जाती है। किसी बात से लेकर होनेवाली चिंता का हल ढूंढ़ने ( Ways to stay away from anxiety and stress ) हम खुद को विचारों में उलझा लेते है। कुछ चिंताएं हम सुलझा भी लेते है किन्तु ज्यादा तर हम मन के विचारों में उलझे ही रहते है। इससे मन का तनाव बढ़ता जाता है।
इसी नैराश्य और विफलता के कारण हम Depression का शिकार हो जाते है। समस्याओं को सुलझाते सुलझाते उन्हीं समस्याओं के चिंता में खुद को काफी उलझा लेते है। इसलिए चिंता मुक्त कैसे रहे इसका चिंतन करना अनिवार्य हो जाता है।
| चिंता मुक्त कैसे रहे। |
आय से ज्यादा क्रय से बढ़ती चिंताएं।
पारिवारिक समस्याओं से निर्माण होनेवाली चिंताएं।
रोज़मर्रा के जीवन में आनेवाली समस्याओं से विचलित होना।
किसी का दबाव मन पर ज्यादा महसूस करना।
गलत धारणाओं का शिकार होना।
व्यसनों के अधीन होना।
भौतिक जीवन के लिए अनावश्यकता को महत्व देना।
आय से ज्यादा क्रय से बढ़ती चिंताएं।
यह एक समस्या सबसे ज्यादा चिंताओं का कारण होती है हम जितना कमाते है।वह हमारे और हमारे परिवार के लिए कम होती है। जितना कमाते है उससे ज्यादा खर्चे रहते है। इसलिए मन में चिंताएं बढ़ जाती है।
पारिवारिक समस्याओं से निर्माण होनेवाली चिंताएं।
हमारे परिवार में पती पत्नी , भाई भाई , भाई बहन , मातापिता या कोई सगे संबंधी जिनसे हमारी अनबन होती है।नियमित रूप से चलने वाले झगड़ों की वजह से मन में चिंताओं के बोझ का बढ़ाते है।
रोज़मर्रा की समस्याओं से मन का विचलित होना।
रोजमर्रा की जीवन में हमें काफी परेशानियां आती है। जैसे हम रस्तेसे चलते वक्त कोई Accident या किसी कारणवश हमें होनेवाली देरी। इससे मन का तनाव बढ़ता जाता है।
मन पर किसी का दबाव महसूस करना।
हमारे Office में Boss का रहनेवाला Pressure। किसी भी छोटी या बड़ी चीज या बात के लिए हमारी होनेवाली Blackmailing हमारे मन का दबाव बढ़ती है।
गलत धारणाओं का शिकार होना।
हमको फसाने या किसी कारण वश हमसे होनेवाली धोखाधड़ी मन में तनाव उत्पन्न करती है। खुद के प्रती हीनता के भावों से ग्रसित मन चिंताओं से ग्रसित हो जाता है।
व्यसनों के अधीन होना।
यह काफी आम किन्तु सबसे ज्यादा खतरनाक स्थिति है। व्यसनों के अधीन रहना हमारे जीवन में सामाजिक , भौतिक तथा मानसिक चिंताओं का कारण होती है।
ज्यादा तर यह अवधारणा है की चिंताओं से थोड़ा मन को दूर के जाने के लिए व्यसनों का सहारा लिया जाता है। किन्तु यह एक गलत अवधारणा है। व्यसनों के अधीन होना हमारे मस्तिष्क तथा मन को ज्यादा Depression के स्थिति में ले जा सकता हैं।
भौतिक जीवन में अनावश्यकता को ज्यादा महत्व देना।
यह भी एक हमारी चिंताओं का बड़ा कारण है। हमारे मन में ईर्ष्या और लोभ हमें जीवन के अनावश्यकता को महत्व देने के लिए बाध्य करते है। ईर्ष्या वश हमारे मन में अनावश्यक विचार चिंताएं उत्पन्न करती है।
चिंता मुक्त कैसे रहे ? चिंताओं से दूर रहने के किए हमें क्या करना चाहिए।
हमारे मन के भीतर जो चिंताएं होती है। वह एक पल या एक दिन नहीं मिट सकती। कुछ बातों को हमें खुद को समझाना होगा।
| चिंता मुक्त कैसे रहे। |
चिंता मुक्त कैसे रहे ? इस से जुड़ी एक कथा।
एक व्यक्ति चिंताओं में काफी उदास रहता था।उसका जीवन परेशानियों से भर गया था। इसलिए बड़ी बेचैनी में वह घर छोड़कर जंगल की ओर चल पड़ा। उसके मन में खुद को समाप्त कर समस्याओं से छुटकारा पाए, चिंता मुक्त कैसे रहे ? बस यही विचार था। काफ़ी दुर जाने के बाद उसे एक संत मिले जो एक वृक्ष के नीचे ध्यान में बैठे हुए थे।
संतों के दर्शन से उसके मन में विचारों कि गति धीमी हो गई। और उसका चित्त स्थिर हो गया। उसे लगा कि यह महात्मा हमे कोई न कोई हल अवश्य बताएंगे। इसलिए वह उनके चरणों में जाकर रोने लगा। उसके स्पर्श से संत की आंखे खुली उसे रोता देख उन्होंने उसे शांत किया और अपने समीप बिठाया और उसे उसके रोने का कारण पूछा। उस व्यक्ति ने कहा ” हे महात्मा मेरा जीवन ही व्यर्थ है। समस्याओं से घिरा है। बहुत सारी चिंताएं मन को उदास करती है। मै खुद को अपने विचारो से दूर नहीं कर पा रहा। चिंता मुक्त कैसे रहे ? चित्त स्थिर होने का कोई उपाय हो तो बताए।”
संत मुस्कुराए उन्होंने कहा कि “तुम इतनी दूर से आए हो तुम तृष्णा और भुक़ से व्याकुल हो। थोड़ी दुरीपर एक सरोवर है वहा पानी पियो और कुछ फल भी वहां मिल जाएंगे वह खालो और फिर मेरे पास आओ। मैं तुम्हारा मार्गदर्शन अवश्य करूंगा। आते आते इस पात्र में थोड़ा जल मेरे लिए भी लेते आना ।”
यह सुनकर वह व्यक्ति सरोवर के पास गया।फल और पानी पीकर तृप्त होकर संत के लिए पात्र में जल लेकर संत के पास वापस आया। संत ने उसे अपने समीप बिठाया। जल का पात्र हात में लिया और पूछा ” इस पात्र में कितना जल होगा?” उस व्यक्ति ने कहा कि “थोड़ा ही जिससे आपकी तृष्णा मिट जाए।” संत ने फिर पूछा ” क्या मै यह हाल पात्र अपने हात से उठा सकता हूं?”
उस व्यक्ति ने कहा “अवश्य आप इसे उठा सकते है। इसे उठाने में आपको कोई दिक्कत नहीं होगी ” संत ने फिर पूछा ” मै इस पात्र को कितनी देर उठा सकता हूं?” उस व्यक्ति ने कहा “आप इसे कुछ देर या उससे थोड़ा अधिक समय उठा ही सकते है।” संत ने और पूछा ” अगर मैंने इसे नीचे रखा है नहीं । हात में ही उठा के रखा तो क्या होगा?”
व्यक्ति ने कहा कि “आपका हात दुख जाएगा।” संत ने और पूछा ” हात दुखने के उपरांत भी मै इसे उठा कर ही रखता हूं तो क्या होगा?” व्यक्ति ने कहा “आपका हात बधीर या सुन्न हो जाएगा।” संत ने और एकबार पूछा ” मेरा हात सुन्न होने के बाद भी मै इसे नीचे ना रखु तो क्या होगा?” व्यक्ति ने कहा कि “महाराज, आपके हात को लकवा मार जाएगा आपका वह हात कुछ कम नहीं के सकेगा। “
संत ने और बात पूछी “इस जल के पात्र से मेरा हात लकवा मार सकता है, अगर ऐसा न हो तो मुझे क्या करना होगा?” व्यक्ति ने कहा ” सीधी सी बात है जब आप को प्यास लगे तब जल का पात्र उठाकर जल पी लीजिए और पात्र को नीचे रख दीजिए।”
संत मुस्कुराए और बोले ” हम जीवन में समस्याएं भी इसी तरह की होती है, इन्हे कुछ देर तक अपने दिमाग में रखो तो लगेगा सब कुछ ठीक है छोटी सी बात है। फिर उनके बारे में ज्यादा से ज्यादा सोचने लगेंगे। उससे हमें पीड़ा होगी।फिर भी हम समस्याओं के बारे में ज्यादा से ज्यादा सोच विचार करते है मन में विचारो का सैलाब सा आ जाता है समस्याओं से हमें नैराश्य का लकवा मारने लगता है फिर भी हम समस्याओं को नहीं छोड़ते।
जीवन में समस्याओं का होना और उसे हल करते करते जीवन यापन करना ही जीवन जीने का सही अर्थ है। किन्तु समस्याओं को विचारो से जकड़े रखना मूर्खता है। और यही चिंता मुक्त कैसे रहे ? इस प्रश्न का उत्तर भी।”संत ने उस व्यक्ति को चिंता मुक्त कैसे रहे इस का जवाब दे दिया और उसे कहां ” समस्याओं के बारे में चिंता करना छोड़ दो और जीवन को मुस्कुराते हुए जियो। समस्याओं का हल भी मिल ही जाएगा। जो विचारों को जकड़कर नहीं मिलेगा।” यह सुन उस व्यक्ति का हृदय शांत हो गया। और संत को नमन कर वह अपने घर गया।
तात्पर्य :– चिंता मुक्त कैसे रहे यह हमारी सोच पर ही निर्भर करता है। जीवन में समस्याओं का होना साधारण है। हर किसी के जीवन में समस्याएं होती ही है। किन्तु मन के विचारों में उसकी चिंता व्यर्थ है। चिंता करने से मन दूषित होता है। किसी भी समस्याओं की चिंता न करते हुए मन में समस्याओं का चिंतन होना अति आवश्यक है।
मन के विचारों को स्थिर करने के लिए ध्यान आवश्यक है। मन की एकाग्रता , विचारों में स्थिरता यह चिंतामुक्त मन के लिए महत्वपूर्ण होते है।
चिंताएं एवं समस्याएं एक दिन या पल भर में खत्म नहीं हो सकतीं। फिर हम क्यो विचारो को अस्थिर कर चिंता मुक्त कैसे रहे ? इस प्रश्न में मन को उलझा देते है। चिंताओं के हल हमारे चित्त के स्थिर होने पर मन में ही खोजें जा सकते है। हम अकारण ही चिंता से ग्रस्त हो कर मन को दूषित करते है।
( Ways to stay away from anxiety and stress )
सत्य को धारण करना:– यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि हम खुद को या दूसरों को न उलझाए। सत्य का अस्तित्व वास्तव, यथार्थ और विश्वास पर कायम रहता है इसलिए वह मन को दूषित नहीं करता और ना ही उलझाता है। सत्य विचारों कि क्रियाशीलता को कम करता है। इसलिए मन चिंतामुक्त रहता है।
भौतिकता को सीमित करना:– भौतिक सुखों की लालसा चिंता का बड़ा कारण होता है। भिन्न भिन्न तरीकों से भौतिक सुखों की अभिलाषा मन के दुख और चिंता का मार्ग होता है। अगर भौतिक सुखों को सीमित दायरे में रखकर जीवन को सुलभ करने हेतु प्रयत्न किए जाए तो चिंताओं का दमन हो सकता है।
ध्यान और योग से मन को एकाग्र करना:– ध्यान और योग यह मन को एकाग्र करने में सहायता करते है। यह मानसिक व्यायाम का तरीका है। जो मन के विचारों को शिथिलता प्रदान कर संतुलित करता है। जिसे चिंताओं का प्रभाव कम हो कर मन की शांति का सरल मार्ग खुलता है।
मन में हम चिंता मुक्त कैसे रहे ?( Ways to stay away from anxiety and stress ) यह सोचने के बजाय हमें किसी भी समस्या पर चिंता करने से अच्छा उस समस्या का चिंतन किया जाए। चिंता करने से हम समय में उलझ जाते है। और चिंतन करने से समस्याओं को सुलझा सकते है।

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