| Truth of life |
Truth of life में हम जीवन के सच को ढूंढने की कोशिश करेंगे। और जानेंगे मन की शांति, सकारात्मकता, विश्वास, एकाग्रता, बौद्धिक विकास यह सब सत्य(सच) के अस्तित्व से ही प्रेरित होते है और सत्य(सच) से ही मजबूत होते है। असत्य (झूठ) के आधार पर यह सब टुट के बिखर जाते है और हमारे जीवन को निराशा के अंधकार में धकेल देते है यही वजह है। झूठ की बुनियाद पर बसे जाने कितने लोग मन की ग्लानि में डूबकर खुद को समाप्त कर देते है।
What is the truth of life | जिवन का सच क्या है?
“जो भी वास्तव है वह सत्य(सच) है। और जिसका अस्तित्व ही नहीं है वह असत्य (झूठ) है।” पर यह कैसे हो सकता है? आज के दौर में सत्य(सच) से ज्यादा असत्य( झूठ) का सहारा लिया जाता है। असत्य (झूठ) ही जीवन का केंद्र या मध्य बनते जा रहा है। और यह सब बिना अस्तित्व के कैसे संभव हो सकता है? यह कदापि संभव नहीं इसलिए तो झूठ की बुनियाद जीवन को अंधेरे में धकेल देती है। सत्य (सच) ही जीवन का एकमात्र आधार है जो हमारे अस्तित्व को संभालता ही नहीं बल्कि उसे एक ऊंचाई भी देता है। जिसे हम Truth of life जिवन का सत्य भी कह सकते है।
| Truth of life |
Truth of Life in Hindi में जाने जिवन सत्य
Truth of Life in Hindi में जानेंगे हमारे जीवन की शुरवात सत्य से ही होती है। बचपन में सिर्फ सत्य या सच को ही जानते है। असत्य या झूठ को ना तो हमारा मन जानता है और ना ही पहचानता है। जिसका अस्तित्व है वहीं मन की छवि होता है। जिसका अस्तित्व ही नहीं वह मन की दर्पण में कैसे दिखाई देगा? किन्तु बचपन में हम बड़ों के व्यवहार , बोलचाल और उनके हावभाव को देखते है, सीखते है। जिसमे झूठ बोलना भी शामिल होता है।
और इसी तरह हम धीरे धीरे झूठ के काल्पनिक अस्तित्व (जो कि नहीं होता) को मन में जगह देते है।
असत्य (झूठ) के परिणाम।
Truth of life में हम देखेंगे असत्य के हमारे जीवन पर गहरे परिणाम होते है। असत्य अस्तित्वहीन होकर भी मन का बोझ बढ़ाता है। मन में नकारात्मक ऊर्जा क्रियान्वित करता है जिसे हमारी जीवन की आशा, उल्हास और विश्वास खत्म हो जाते है। मन का बोझ विचारों की गति को प्रभावित करता है। और विचारों को नकारात्मकता की दृष्टि से भावनाओं पर आघात होता है जिससे दुःख और तकलीफ़ महसूस होती है। असत्य हमारे एकाग्रता को भंग कर मन में नकारात्मक विचारों का सैलाब लाता है जिसे हम अकेलेपन में जीने लगते है। और यही अकेलापन हमारे जीवन के दुषपरिणामों का कारक होता है और यही अनहोनी या अप्रिय घटनाओं को अंजाम दे सकता है।
Importance of truth of life
सत्य हमेशा अस्तित्व के बुनियाद पर टिका रहता है। जो मन पर किसी तरह का बोझ नहीं होने देता। हमारे सच बोलने से किसी के विश्वास को हानि नहीं होती और अगर हम किसी का विश्वास नहीं तोड़ते तो हमपर सब का विश्वास बढ़ता है। जब सब का विश्वास हमपर बढ़ता है तब हमारे शब्दों को महत्व आ जाता है। जब हमारे शब्दों का महत्व होता है तब हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है और हमारा मन सदा प्रफुल्लित रहता हैं। सच बोलने से अनावश्यक बातों के विचार मन को नहीं छूते और इस से मन के विचारों पर संस्कार होते है। मन की एकाग्रता बढ़ती है और हम मन की शांति का अनुभव कर सकते है।
story of truth in hindi
” जब सत्य हमारे मन के भीतर वास करता है तब भाग्य हमारे लिए अपने दरवाज़े खोल देता है।”
story of truth in hindi में आपको सत्य और भाग्य से जुड़ी एक कहानी आपको सुनाता हूं।
महेन्द्र सिंह नाम का एक राजा अपने नगर में कल्याणकारी और प्रजहित दक्षता के लिए जाना जाता था। प्रजहित और प्रजा का कल्याण ही उसका एकमात्र उद्देश्य था। वह खुद भी सदाचारी, सत्यवादी था। पूरे नगर में और आसपास के प्रदेशों में राजा महेंद्र सिंह की कीर्ति एक लोक कल्याणकारी राजा की थी। किन्तु राजा की कोई संतान नहीं थी। इस बात से राजा महेंद्र सिंह हमेशा दुखी रहते थे।
उनके पच्छात उनका राज्य अच्छी तरह कोण देखेगा। किसी को राज्य का भार दिया जाए तो वह प्रजा के हितों की रक्षा , उनकी सुरक्षा और न्याय कर पाएगा। यह डर उनको सोने नहीं देता था। एक दिन राजा महेन्द्र सिंह को एक युक्ति सूझी। और उन्होंने पूरे नगर में ढिंढोरा पिटवा दिया ” जो भी व्यक्ति दिए गए समय पर राजभवन से फूलों के बीज ले जाकर उसके अच्छे पौधे उगाएगा और उन पौधों को सुंदर पुष्प खिलाएगा उसे इस राज्य का उत्तराधिकारी घोषित किया जाएगा। ” सारे नगर में इस बात की चर्चा होने लगी। लोग राजभवन जाकर बीज लाकर उन की बुआई कर अच्छे अच्छे पौधे उगाने लगे।
The truth of Life in Hindi
और फिर वह समय आ गया जब सब के फूलों को देख किसी एक को राजा उत्तराधिकारी घोषित करे। सब लोगों ने अपने अपने पौधे पुष्प राजभवन की प्रांगण में लाए। पूरा राजभवन फूलों से चहेक उठा। सब लोगों ने अपना अपना टैग लगाकर पौधों को एक कतार में लगा दिया। उस कतार में एक गमला ऐसा था जिसमें एक भी पौधा नहीं था। सिर्फ और सिर्फ मिट्टी थी। सुंदर सुंदर पुष्पों और पौधों में वह मिट्टी का गमला देख सब की हसीं फूटती थी। जिसने वह मिट्टी का गमला लाया था वह व्यक्ति गमले पर अपना टैग लगाकर काफ़ी दुर चला गया था।
जब राजा महेंद्र सिंह सारे फूलों और पौधों को देख रहे थे तब उनकी नजर उस मिट्टी वाले गमले पर गिरी। उन्होंने वह गमला देख अपनी सिंहासन की ओर रुख कर लिया और उसपर जा कर बैठ गए। सब शांत हो गए। राजा महेंद्र सिंह अब क्या कहेंगे यह सुनने हेतु सब कुतुहल से देखने लगे।
फिर राजा महेंद्र सिंह उठ खड़े हुए और कहने लगे। ” मैंने इस राज्य का उत्तराधिकारी चुन लिया है किन्तु मुझे एक बात जाननी है कि जिस गमले में सिर्फ मिट्टी है उस व्यक्ति ने उस गमले में फूल या पौधे क्यो नही उगाए।” तब सब लोग उस व्यक्ति की खोज करने लगे। वह व्यक्ति राजा की बात सुनकर खुद को छिपाने लगा।
फिर भी आसपास के लोगों ने पहचान कर उसे राजा के सामने प्रस्तुत किया। फिर राजा ने उसे गमले में फूल ना उगाने का कारण पूछा। वह व्यक्ति राजा से क्षमा मांगकर कहने लगा ” महाराज मुझे क्षमा कर दीजिए किन्तु राजभवन से मैंने जो बीज लेकर गया था वह बीज भुने हुए निकले और आपकी शर्त थी कि राजभवन की बीजों से जो भी पौधा या सुंदर पुष्प उगाएगा उसे ही उत्तराधिकारी घोषित किया जाएगा। पर महाराज बीज भुने होने के कारण वह बीज अंकुरित नहीं हो सके। इसलिए मैंने जो भी था यहां ला लिया।”
राजा का चुनाव
उसकी बात सुनकर राजा महेंद्रसिंह अति प्रसन्न हुए। और उन्होंने कहा कि राजभवन के सारे बीज भुने हुए ही थे। इसलिए वह अंकुरित नहीं होंगे यह उन्हें और गीनेचुने सिपाहियों को पता था। सब लोग राज्य की लालसा से खुद के बीजों से पौधे और पुष्प उगाकर लाए है। “तुम में को सच्चाई है वह इस राज्य की जरूरत है इसलिए मै तुम्हे इस राज्य का उत्तराधिकारी चुनता हूं।” यह कहकर राजा ने उस व्यक्ति का तिलक के दिया।
तात्पर्य:– सच्चाई मन में ना ही लालसा उत्पन्न करती है और ना ही मन में संदेह उत्पन्न करती है। और ना ही मन का बोझ बनती है। सच्चाई हमेशा अपने साथ भाग्य के द्वार खोले रहती है। सिर्फ हमारे मन में सत्य के प्रति एकनिष्ठता और संयम की आवश्यकता होती है।
| Truth of life |
सत्य के सिद्धांत | The truth of Life in Hindi
सत्य याने सत् हितम् जिसमे सबका हित हो वहीं सत्य है। सत् जिसे सद् भी कहते है। जिस प्रकार सद्भावना, सद्विचार, सद्वीवेक, सदाचार, सद्बुद्धि ,सत्कर्म जैैसे आचरण से हम सत्य को उजागर करते है। सत्य ही जीवन का आधार है।
सत्यता ही जीवन का आधार |The truth of Life
सत्य(सच) बोलना , आचरण विचार से सत्य को अपनाना जीवन में कभी भ्रम की स्थिति को उत्पन्न नहीं होने देता और ना ही मन को दूषित होने देता है। मन की शांति का एक सरल उपाय ही सत्य की उपासना है। हमारे आचरण में सत्य को अपनाना जीवन का आधार होता है। झूठ , फरेब, धोका जीवन को मुश्किल स्थिति में डाल सकता है। विचारों को दूषित कर मन में भय, अकेलापन, नकारात्मक विचारों को उत्पन्न करता है।
व्यावहारिक सत्य
क्या हमारे व्यवहार में सत्यता और ईमानदारी होती है? इसका जवाब क्या हम दे सकते है। नहीं दे सकते क्यो की व्यवहार में पूरा सत्य या सच नहीं बोला जाता। पर मेरा यह मानना है कि जब हम अपने व्यवहार को पूरी तरह सत्य में ढाल लेंगे तो यकीनन जीवन के सार्थकता का अहसास होगा।
जब हमारा व्यवहार किसी के साथ अच्छा या बुरे को न देखते हुए सिर्फ सत्य को देखता है तब हमारे प्रति औरों की विश्व काफ़ी बढ़ जाती है।हमारे नजरों में सत्य का वह तेज दिखाई देता है । हमारे व्यवहार में होनेवाली सत्यता की ओर लोग आकर्षित होते है। सत्य से हमारे बर्ताव, रहन सहन में काफी फर्क आता है। सत्य ही जीवन यापन का एक उत्तम और मजबूत मार्ग होता है।
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The truth of Life | May be troubled but not defeated
यकीनन सत्य कभी पराजित नहीं हो सकता । ” जिस तरह अंधेरा कितना भी घनां क्यो न हो प्रकाश की एक किरण अंधेरे को नष्ट कर सकती है” उसी तरह झूठ कितना भी प्रबल क्यो न हो सत्य के उजागर होने से झूठ का अस्तित्व खत्म हो जाता है।”

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