जीवन में शिक्षा का महत्व। shiksha ka mahatva hindi essay.
शिक्षा वह कश्ती है जिस की वजह से हम जीवन के समंदर को बिना डूबे पार कर सकते हैं। शिक्षा जीवन के विकास और प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है। शिक्षा से बुद्धि का विकास होता है और बुद्धि के विकास से विचारों का विस्तार होता है और विचार तर्क को जन्म देते है और तर्क से आविष्कार की खोज होती हैं।
हमारे जीवन में शिक्षा का विकास कैसे हुआ? शिक्षा का क्या महत्व है? किस तरह शिक्षा से विचारों का विस्तार होता है? विचारों के विस्तार से सोच में क्या बदलाव आता है? हमारे दृष्टिकोण किस प्रकार दिशा प्राप्त होती है? हम उन्नत तरीकों और माध्यमों से जीवन को किस तरह बेहतर बना सकते हैं? नए विचारों, धारणाओं तथा आविष्कारों को शिक्षा के माध्यम से संतुलित तथा नियंत्रित रख जीवन के उच्चतम व्यवहार को कैसे पाते है?
वैदिक कालों से है शिक्षा का महत्व ( shiksha ka mahatva )
मनुष्य जबसे जीवन की खोज में लगा है तब से शिक्षा का विकास निरंतर जारी है। प्रकृति में सब जीवों से अलग मनुष्य अपने जीवन को निरंतर विकसित कर रहा था। छोटी छोटी शिक्षा ग्रहण कर जीवन में विकास प्रक्रिया को आगे की ओर बढ़ा रहा था। वैदिक काल आते आते मनुष्य ने अपना प्रभुत्व स्थापित कर दिया था। वैदिक काल में शिक्षा का प्रचार और प्रसार होना सुरु हो गया। शास्त्रों, कलाओं, व्याकरण तथा आविष्कारों के नए नए मापदंडों को नियमों के रूप स्वीकार कर शब्द बद्ध किया गया।
ऋषिमुनियो ने कई वर्षों का अपना ज्ञान अपने शिष्यों में बांटना शुरू किया।ज्ञान की शिक्षासे बुद्धि तथा विचारों में व्यापकता आ गई। कल्पनाओं का विस्तार के साथ सोच को बढ़ावा देने का काम शिक्षा द्वारा होता रहा है और आगे भी होते रहेगा।
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पश्चिमी देशों में शिक्षा का विकास ( shiksha ka mahatva)
पश्चिमी देशों शिक्षा प्रसार सबसे ज्यादा और जल्द हो गया था। उसके दो प्रमुख कारण हो सकते है।
१)व्यापार,उद्यमता तथा सामाजिक क्षेत्रों के विकास के तौर पर बुनियादी जरूरतों के लिए नई बातें, नए मार्ग और नई कल्पनाओं कि आवश्यकता के लिए शिक्षाके महत्व को वह जल्दी समझ गए होंगे।
२) आर्थिक, सामाजिक, भौतिक और आध्यात्मिक विषमता के दुष्परिणामों से जीवन विकास प्रक्रिया को खंडित कर दिया और उससे उभरने के लिए तत्कालीन सुधारकों ने शिक्षा के महत्व को उजागर कर उसका प्रचार किया होगा।
(हमारे देश में इस प्रक्रिया को काफी देर हो गई थी। हमारे देश अलग अलग धर्मो तथा जाति–पंथों में बंटा है। अलग अलग विचारधारा से जुड़ा है। अनेकों अंधश्रद्धा से लड़ना काफी मुश्किल था। इसके बावजूद हमारे तत्कालीन सुधारकों ने खुद की परवा कीए बगैर समाज को देश को शिक्षा के प्रवाह में लाने की भरपूर कोशिश की और उसमें वह सफल हो गए।)
शिक्षा के महत्व(shiksha ka mahatva) के कारण औद्योगिक विकास की ओर।
पश्चिमी देशों में शिक्षा के विकास को मजबूती मिली और वह औद्योगिक क्रांति की शुरवात हो गई। नई नई कल्पनाओं से आविष्कारों से औद्योगिक क्षेत्रों में उन्नति के मार्ग प्रशस्त हो गए। जीवन को बेहतर ढंग से जीने के और अलग अलग क्षेत्रों में जीवन की सफलता के मार्ग खुलकर सामने आ गए। उद्योगों से व्यवसाय बढ़ा और जीवन यापन की स्थिति में सुधार की प्रक्रिया को गति मिली।
शिक्षा के कारण गलत धारणाओं से मिला छुटकारा।
हमारे देश में अंधश्रद्धा के आधार पर फैली गलत धारणाएं और नियमों से हमारे जीवन में कठिनाइयां और डर का माहौल था। हर धर्म, पंथ , जाति की एक अलग विचारधाराएं और अलग नियम और अलग धारणाओं से इसे बदलना इतना आसान नहीं था। कुप्रथाओं का, बुआबाजी का, स्वर्ग या नरक जैसी धारणाओं से हमारे जीवन विकास के सारे रास्ते बन्द थे।शिक्षा को सीमित दायरे में रखकर उच्च वर्ग अन्य समाज को अपने मुट्ठी में रखने में सफल था।
धारणाओं को बदलने के लिए , समाज को शिक्षा का महत्व समझाने के लिए और शिक्षा को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए तत्कालीन सुधारकों ने काफी मुश्किल स्थिति में धारणाओं तथा अंधश्रद्धा को बदला है। हमें शिक्षा के प्रवाह में लाकर हमारे जीवन को बेहतर बनाया है। हमें आजीवन उनके ऋणी रहेंगे जिन्होंने शिक्षा के महत्व को समझकर उसका प्रचार और प्रसार किया। जिसके कारण आज हमारा देश दुनिया के हर बुलंदियों को हासिल करने की काबिलियत रखता है।
शिक्षा से होता है हमारे बुद्धि और विचारों का विकास ( shiksha ka mahatva)
शिक्षा जीवन के लिए बहुत जरूरी है। शिक्षित व्यक्ति जीवनयापन के साधनों को जुटाने ने में सक्षम होता है। सोच को नई दिशा मिलती है। अच्छे बुरे के भेदों को जानने में समर्थ होता है। किसी चीज पर विश्वास करना या ना करना यह अपने विचारों से जान सकता है। निर्णय लेने के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहता। शिक्षित व्यक्ति अपने सपनों को साकार करने के लिए विचारों का विस्तार करता है।
नई नई कल्पनाओं सोच कर नए आविष्कारों के माध्यम से जीवन को सुकर और सामर्थ्यवान बनाने में सक्षम होता है। गलत धारणाओं तथा गलत चीजों का खुलकर विरोध करना और किसी के बहकावे में न आना यह शिक्षित व्यक्ति के लक्षण है जो अच्छे और बुरे की समझ रखता है।
(shiksha ka mahatva) धन और बल से भी श्रेष्ठ है ज्ञान।
धन से सुख सुविधाओं की वस्तुओं को खरीदा जा सकता है। धन बल को भी प्राप्त कर सकता है। किन्तु धन सदाचार, सद्विवेक, सज्जनता को नहीं खरीद सकता। धन मन की शांति, खुशियां, नींद को भी नहीं खरीद सकता। उसी प्रकार बल से धन की प्राप्ति तो कर सकते है किंतू ज्ञान नहीं जोड़ सकते। सिर्फ ज्ञान ही एकमात्र ऐसी चीज है जो धन और बल को प्राप्त कर सकती है। सद्विवेक, सदाचार, सज्जनता तथा मन की शांति का कारण ज्ञान ही होता है।
अंधेरे जीवन की राह है शिक्षा।( shiksha ka mahatva)
शिक्षा हमारे जीवन में प्रकाश का उजाला लाती है।
शिक्षा स्वावलंबन की ओर प्रेरित करती है।
शिक्षा संघर्ष के लिए सदा तत्पर करती है।
शिक्षा मन के भेदों को मिटाकर सर्वग्यता का एहसास कराती है।
शिक्षा ही हमारे जीवन को सफल बनातीं है।
शिक्षा भाग्य की कुंजी होती है।
शिक्षित समाज से प्रगतशिल राष्ट्र का निर्माण होता है।
अज्ञानता जीवन को नरक और ज्ञान जीवन को स्वर्ग बना सकता है।
अशिक्षा से उदासीनता और शिक्षा से चैतन्य निर्माण होता है।
शिक्षा हमारे काबिलियत को निखारती है। और हमारी काबिलियत सफलता को खींच लाती है।
अज्ञानता हमारे उन्नति के मार्ग को बंद करते जाती है। और हमारा ज्ञान हमारे उन्नति के कई मार्ग खोल देता है।

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