motivational story in hindi
motivational story in hindi में जिवन के मूल्य को जानने के लिए एक story प्रस्तुत की है जो आप को जिवन के सही अर्थ को जानने के लिए काफी help कर सकती है।
जीवन का मूल्य क्या है।
motivational story in hindi में हम जानते है की हमारे जीवन का मूल्य क्या है? क्या हम अपने जीवन की सही कीमत लगा सकते है? क्या हम अपने जीवन के सच को जानते है? क्या हमें ये पता है कि हमारे जीवन में सबसे महत्त्वपूर्ण क्या हैं? क्या सही मायनों में जीवन को समझा जा सकता है? क्या हम अपने जीवन के सही मूल्य का पता लगा सकते है?
कई सवालों के जवाब हमारे पास नहीं होते। और ना ही हम उस ढूंढने की कोशिश करते है। इसलिए जीवन की उलझनों में फस जाते है। जीवन के सही मायनों को ढूंढने की , समझने की , हमारे जीवन के मूल्यों की जब भी हम समीक्षा करते है उन रहस्यमयी सवालों के जवाब ढूंढ़ने की कोशिश करते है। जीवन को यथार्थ रूप से जानने की कोशिश करते है तब सही मायनों में हम जीवन की गरिमा को समझ सकते है। और दुखों, उलझनों,आकांक्षाओं को उनकी सीमाओं में बांधकर हम जीवन के हर पैलू का आनंद और लुफ्त उठा सकते है।
और यही बात हम ने motivational story in hindi के द्वारा आप को समझाने की कोशिश की है।
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motivational story in hindi में जाने जीवन क्या है?
क्या हम जानते है कि जीवन क्या है? रोज सुबह उठते है। अपनी दिनचर्या की शुरवात करते है। काम करते है। भूक लगने पर खाते है। और नींद आने पर सो जाते है। रोजमर्रा की जीवन में हमारी यही दिनचर्या होती है। क्या यह जीवन है।
आप या मै इस बात को भलीभांति जानते भी है और समझते भी है कि यह जीवन नहीं है। शून्यता से पूर्णता की ओर किया गया हुआ प्रयास ही जीवन हैं। जीवन के सही अर्थ को हम मन के भेद से तो जान ही सकते हैं।
जीवन का मूल्य क्या है?
motivational story in hindi
वैदिक काल में जब गुरुशिष्य परंपराओं की ख्याति सर्वदुर थी तब शिष्य अपने गुरु के आश्रम में शिक्षा प्राप्त करने आते थे। १२ वर्ष या १४वर्ष गुरु की सेवा कर उनसे शिक्षा प्राप्त करते थे। गुरु उन्हें शास्त्र विद्या , शस्त्र विद्या, जीवन विद्या का पाठ पढ़ाते थे। अपने शिष्य को जीवन की अंतर्दशा और बाह्यदशा का पाठ पढ़ाकर जीवन के भेदों का रहस्य बताते थे। उपनिषदों में ऐसी कई कहानियां हम पढ़ सकते है। उसी से एक कहानी motivational story in hindi आपको बताता हूं।
एक गुरु के आश्रम में कई शिष्य शिक्षा प्राप्त कर रहे थे। उसी शिष्यों में एक शिष्य जीवन की सार्थकता के लिए गुरु से उपदेश कि हठ करता है। किन्तु जीवन की महत्ता को जाने बगैर , जीवन के मूल्यों को समझे बगैर गुरु उसे जीवन की सार्थकता का उपदेश नहीं देना चाहते। गुरु उसे समझाते है कि जब तक तुम जीवन के मूल्यों को नहीं समझोगे। जीवन की कीमत नहीं जानोगे तबतक जीवन की सार्थकता व्यर्थ है।
फिर वह शिष्य सेवा में लगा रहा। और हर वक्त जीवन के मूल्य को आंकने की कोशिश करता रहा फिर भी उसे जीवन का कितना मोल या जीवन कि कीमत क्या हो सकती है यह समझ नहीं आ रहा था। फिर एक दिन वह शिष्य गुरु चरणों को पकड़कर गुरूसे अनुरोध करने लगा कि “आप सर्वज्ञानी है आप मुझे जीवन का सही मूल्य बताने की चेष्टा करे, मै आपकी शरण में आया हूं”। उस शिष्य की जिज्ञासा देख गुरू ने उसे एक पत्थर दिया और कहां की ” जाओ इस पत्थर के अधिक से अधिक मूल्य को निर्धारित कर के आओ, और याद रखो कि यह पत्थर तुम्हे बेचना नहीं है सिर्फ इसका मूल्य निर्धारित करना है।” गुरु के इस वचनों को आज्ञा मानकर वह शिष्य उस पत्थर को लेकर बाजार की तरफ चल पड़ा।
रास्ते में उसे एक सब्जीवाला मिल गया उस शिष्य ने वह पत्थर उस सब्जीवाले को देकर कहां की ” तुम इसके बदलें में मुझे क्या से सकते हो?” उस सब्जी वालेने उस पत्थर को गौर से देखा और कहा “वैसे तो मुझे इस पत्थर की कोई जरूरत नहीं है फिर भी सब्जियां तोलने के लिए मेरे काम आ सकता है इसलिए मै आपको इसके बदले कुछ सब्जियां दे सकता हूं।” उसकी बात सुनकर उस शिष्य ने पत्थर को वापस लेकर यह निर्धारित कर दिया कि इस पत्थर का मूल्य कुछ सब्जियां ही है।
किन्तु गुरुदेव ने अधिक से अधिक मूल्य निर्धारित करने के लिए कहां इसलिए क्या इससे ज्यादा इसका मूल्य हो सकता है या नहीं यह देखने के लिए आगे जाने का विचार किया और आगे चल पड़ा।आगे उसे एक फल का व्यापारी फल बेचते दिखा तो वह शिष्य उसके पास गया और उस व्यापारी को कहने लगा कि “तुम इस पत्थर के बदले क्या दे सकते हो।”
तो उस व्यापारी ने बड़े गौर से पत्थर को देख हसने लगा , व्यापारी को लगा यह व्यक्ति भूका होगा इसलिए अपनी भुक मिटाने के लिए कुछ मांगने में संकोच कर रहा है इसलिए यह पत्थर बेच रहा है। व्यापारी ने मैं ही मन दया दिखाकर कहा कि ” इस पत्थर के बदले मै तुम्हें १० संतरे ,कुछ केले और कुछ अतिरिक्त फल देता हूं जो तुम्हारी भूक़ मिटाने के लिए काफी होंगे।” उस शिष्य ने मन ही मन उस पत्थर की कीमत को निर्धारित कर वह पत्थर लेकर आगे चल पड़ा।
आगे उसे एक लोहार की दुकान दिखी लोहार ने भी कुछ वस्तुएं देकर पत्थर का मूल्य निर्धारित किया। फिर वह शिष्य एक सुनार कि दुकान में गया और उसे वह पत्थर दिखाया सुनार ने पत्थर को गौर से देख आश्चर्य चकित हो कर उस शिष्य को पत्थर के बारे मी पूछा। और सिर्फ एक पत्थर नहीं बल्कि हीरा है या बात बताई और १०० सुवर्णमुद्राए लेकर पत्थर को यही छोड़ जाने की बात उस शिष्य से की। किन्तु शिष्य ने गुरुदेव की बताई बात उस बता दी और उस पत्थर की कीमत का निर्धारण १०० सुवर्णमुद्राए की।
फिर भी जिज्ञासा वश वह शिष्य उस पत्थर को रत्नों के जानकार के पास ले गया और उसका असली मूल्य बताने को कहा। उस जानकार ने वह रत्न देख उसे प्रणाम किया। और कहा “यह रत्न “रूबी -कुरुविंद” नामक एक बेशकीमती रत्न है। संसार का कोई भी जानकार इसका मूल्य नहीं बता सकता।” यह सुनकर आश्चर्यचकित भाव से वह शिष्य गुरुदेव के पास लौटा और अपने गुरु को सारी हकीकत बता दी।
फिर गुरुदेव ने उस शिष्य को कहां की “जीवन का मूल्य भी अपने विचारों से ही लगाया जा सकता है। जो व्यक्ति जीवन को भौतिक सूखों के अधीन मानता हो वह जीवन के मूल्य को उसके हिसाब से ही निर्धारित करेगा। और जो व्यक्ति जीवन के उद्देश्य को जानकर सुख – दुःख से परे कर्म रहित जीवन के तत्व को पहचानेगा वहीं व्यक्ति जीवन के अनमोलता को पहचान सकेगा। हर एक व्यक्ति अपने आकलन से , बुद्धि से भौतिक सुखों में जीवन की सार्थकता को ढूंढता है। इसलिए नैराश्य से ग्रस्त है। शरीर और कर्म की अलिप्तता ही जीवन के सार्थकता की बुनियाद है।”
शिष्य ने गुरु के चरणों में प्रणाम कर जीवन के मूल्यों और सार्थकता के उपदेश के लिए गुरुदेव को कोटि कोटि धन्यवाद दिए।
हम जीवन के भौतिक सुख दुखों में इस तरह उलझ गए है कि जीवन के मूल्य को नहीं जान पा रहे है।
।motivational story in hindi का विश्लेषण
जीवन को जानना इसलिए महत्वपूर्ण है क्यों की हम भौतिक सुख-दुखों , उलझनों के फेरे में खुद को फंसाकर रखे है।
हमारी उलझने, दुःख हमारी तकलीफें यह सिर्फ और सिर्फ हमसे ही निर्मित है। हमारे जीवन की दशा और दिशा को बदलना सिर्फ हमारे हाथ में होते हुए भी हम खुद की कीमत नहीं जानते। खुद का उचित मूल्य नहीं लगा सकते। इसके लिए हमें खुद को परखना होगा। हमारे गुणों को जानना होगा।
उलझनों को पहले ही समझना होगा। सुख के पिच्छे ना भागकर खुद के गुणों को विकसित करना होगा। सुख और दुखों के मायनों से बचकर जीवन के आनंद का लुफ़्त उठाना ही जीवन का सच होता है।
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जीवन में महत्वपूर्ण क्या है।
motivational story in hindi के माध्यम से हम ने या जाना कीजीवन में महत्वपूर्ण यही है के हम जीवन में कर रहे कर्मों को खुद का निजी स्वार्थ , भोग या लालच की वजह से न करके हमारे जीवन के कर्तव्य को समझकर करने की जरूरत है। जब हम किसी कर्तव्य की भावना से किसी कर्म को करते है तो उसमें निष्कामता के भाव प्रगट होते है। जो हमारे सुख दुःख का कारक नहीं होते और ना ही कोई उलझने उन्हें बांध सकती है।
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