जीवन में त्योहारों का महत्व पर निबंध Importance Of Festival In Our Life

 हमारे जीवन में त्योहारों का महत्व।

(The importance of festivals in our lives)

 

त्योहारों की संकल्पना।

हम त्योहारों को मनाते हैं। हमारे भारतीय संस्कृति में जीवन में त्योहारों का महत्व सब से ज्यादा है। हमारा देश एक कृषिप्राधन संस्कृति कि धरोहर है। इसलिए प्रकृति से जुड़े त्योहारों का महत्व हम समझते है। जिस प्रकार हमारे देश में अलग अलग संस्कृतियों का विस्तार हुआ उसी प्रकार हर संस्कृति के त्योहारों का भी विस्तार हुआ और हर त्योहार हमारे जीवनशैली का हिस्सा हो गए। हमारे जीवन में त्योहारों का महत्व लोककथाओं से जुड़ा हुआ होता है। काफ़ी रंजक और जीवन के पैलूओं उजागर करती हमारी लोककथाएं हमारे त्योहारों में स्पष्ट रूप से झलकती है। अलग अलग संकल्पनाओं के सिद्धांतों में हमारे त्योहारों को देखा जा सकता है। याने हमारे जीवन की हर मूल संकल्पना त्योहारों के द्वारा हमें खुद से और हमारे अपनों से जोड़ती है।

 

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जीवन में त्योहारों का महत्व क्यों है जरूरी।

जीवन यापन की स्थिति में हम रोज अपने जीवन को एक दिशा देने के लिए  सफल बनाने के उद्देश्य से काम करते है। मेहनत करते है। कठिनाईयां तथा दुःख के साथ खुद को खुशहाली की ओर बढ़ाते है। रोज रोज के कामों से मन और विचार उब जाते है। मन में निराशा, अकेलापन, तनाव, उदासीनता के भाव उजागर होने कहते है। इसलिए त्योहार हमारे जीवन में नई ऊर्जा भर देते है। त्योहार हमारे जीवन में  Energy Drinks की तरह काम करते है। जिससे हम प्रसन्नता से नई उमंग से नई ऊर्जा के साथ जीवन को जीने के लिए तयार हो जाते है। जो हमारे जीवन में जीवन में त्योहारों का महत्व को उजागर करता है।

 

जीवन में त्योहारों का महत्व

जीवन में त्योहारों का महत्व



त्योहारों से होती है मन की प्रसन्नता।

हमारे जीवन में त्योहारों का महत्व हमारे भावनाओं से जुड़ा है। त्योहारों के आने से मन में ऊर्जा का संचार होता है। एक नया उत्साह और उमंग हमारी भावनाओं को, विचारों को शिथिलता प्रदान करता है। जिससे हम थोड़ा मन के बोझ को कम करते है। त्योहार हमारे जीवन की सकारात्मकता को बढ़ाते है।  त्योहारों पर हम नए वस्तुओं, नए परिधानों को खरीदते है। उससे हमारे में हर्ष और उल्हास की भावना जागृत होती है। नए नए पदार्थों से हम पारिवारिक एकता में मिठास लाते है। जीवन में त्योहारों का महत्व कही अधिक है जो हमारे जीवन में आनंद और खुशियों का पर्व होता है।

 

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अपनों से मेलमिलाप – भावनिक एकता का दर्शन।

रिश्तों को संजोयें रखने में भी हमारे जीवन में त्योहारों का महत्व अधिक है। जब हम हमारे अपनों के साथ त्योहार मनाना हमारे खुशियों को द्विगुणित करता हैं।  जब हम अपनी जीवन की राह खोजने के लिए अलग राह को चुनते है तब हमारे अपने कहीं न कहीं हमसे बिछड़ जाते है। हमें समझने वालों का साथ छूट जाता है। जीवन की राह में हम अकेले ही होते है। कहीं न कहीं मन में इस बात का मलाल रहता ही है। उनकी यादें हमारे विचारों में विवशता लाती है। सम्बन्धों में आई दूरियां त्योहारों से नजदीकियों में बदल जाती है।  मन की कटुता को भूलकर  हमारे संबंधों में नई ऊर्जा लाने का काम त्योहार करते है। हमारे जीवन में रिश्तों की अहमियत बहुत होती है। और त्योहारों के वजह से ही रिश्तों में मधुरता बनी रहती है।

हमारी परंपराएं – हमारी धरोहर।

हमारे संस्कृति से जुड़ी हमारी परंपराए हमें हमारे पिछले पीढ़ी से धरोहर स्वरूप मिली है। जो हमारे जीवन में त्योहारों का महत्व हमें स्पष्टता से उजागर करती है और हमें इन परंपराओं को संजोगे रखना है और अगली पीढ़ी को देना है। पीढ़ी दर पीढ़ी हमारे त्योहारों में हमारी परम्पराओं को संजोगे रखा है। हमारी संस्कृति के नीव को मजबूत बनाने के लिए यह काफी हद तक जरूरी भी हैं। परम्पराओं को धारण कर हमारे त्योहार हमारी जीवनशैली को हमारे संस्कृति से जोड़े रखती है। इसलिए त्योहारों का महत्व हमारे जीवन में काफी ज्यादा और महत्वपूर्ण भी है।

 

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त्योहार हमारे सामाजिक और संघटित एकता के है प्रतीक।

जीवन में त्योहारों का महत्व जानकर ही सन१८९३ में लोकमान्य तिलक जी ने सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरवात की। अंग्रेजो के खिलाफ तथा गलत धारणाओं और रूढ़ियों को समाज से नष्ट करने के लिए सामाजिक और वैचारिक तौर पर संघटित होना जरूरी था। इस बात को ध्यान में रखकर लोकमान्य तिलक जी ने त्योहारों को आधार बनाया। वह ये बात जानते थे कि त्योहार ही हमारे सामाजिक और वैचारिक एकता के स्त्रोत है। अंग्रेजो के खिलाफ तथा सामाजिक गलत धारणाओं और रूढ़ियों के विरूद्ध उन्होंने शिवजयंती और गणेशोत्सव जैसे त्योहारों को आधार बनाकर तत्कालीन युवाओं में वैचारिक क्रांति का बीजारोपण किया।

 

त्योहारों के अलग अलग रंगों से बढ़ती है जीवन की खूबसूरती।

त्योहार जीवन में आनंद की अनुभूति करा देता है।  अलग अलग त्योहारों से जीवन की अलग अलग रंगों में हम ढलते है। त्योहार हमारे संस्कारों को उजागर करता है। प्रकृति के हर रूपों से हमें अवगत कराते है। प्रकृति के सम्मान को बढ़ाने के लिए। त्योहारों को यथार्थ रूप से समझने कि आवश्यकता है। मृतत्मा से लेकर प्रकृति के हर जड़ और चेतन वस्तुओं या पदार्थो का आदर हम अपने त्योहारों के माध्यम से ही जान सकते है।

त्योहार हमारे जीवन की खूबसूरती को जैसे आनंद, खुशियां, आदर,प्रेम सम्मान जैसे भावों को उजागर करता है

 

त्योहारों में स्वार्थ।

आजकल हम बहुत Practical हो गए है। त्योहारों में भी स्वार्थ को बड़ा महत्व देने की चेष्टा कर रहे है। प्रकृति के प्रति आदर भावों को भूलते जा रहे है। खुद के सुखों , आनंद के लिए  दूसरों को दुःख देने में भी हम परहेज नहीं के रहे। त्योहारों में व्यावसायीकरण का खेल काफ़ी हद तक हमारे लिए नुकसान कारक हो सकता है।

यह हमें सोचना है।  त्योहारों की गरिमा को हमें बनाए रखना है या हमें अपने स्वार्थ से तोड़ना है।

त्योहार या उत्सव हमारे जीवन में उमंगों की आशा है।

 

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जीवन में त्योहारों का महत्व
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