स्वामी विवेकानंद के विचार बदल सकते है आपकी जिंदगी।

 

स्वामी विवेकानंद के विचार हिंदी में।

आपके जीवन को बदल देंगे स्वामी विवेकानंद के विचार ।

स्वामी विवेकानंद जी को हम सब जानते है। उनके बारे में अलग बताने की जरूरत नहीं। स्वामी जी हमेशा ही युवाओं के प्रेरणास्त्रोत रहे है। और कई शतकों तक रहेंगे। अपने अलौकिक आध्यात्मिक शक्तियों तथा ज्ञान से पूरे विश्व में अपने ओजस्वि वक्तृत्व से मंत्रमुग्ध करने वाले स्वामी विवेकानंद हमारे देश के गौरव तो है ही। अपितु उनके विचार हमारे जीवन को हमेशा नई कल्पनाओं से, नई प्रेरणा से, और नए संकल्पों से  उत्तेजित करते रहेंगे।

आज हम स्वामी विवेकानंद के विचार संग्रह से कुछ विचारों को प्रस्तुत करते है। जिससे हमारे जीवन में हमें आगे बढ़ने और विवेक से जीवन को सही मायनों में जीने के लिए प्रेरित करेंगे।

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स्वामी विवेकानंद के विचार

आप वही होंगे जो आप सोचोगे। अगर आप सोचते हो कि आप कमज़ोर हो तो आप कमज़ोर हो जाओगे। और अगर आप खुद को मजबूत मानते हो तो यकीनन आप मजबूत बन जाओगे।

(You will be what you think.  If you think that you are weak then you will be weak.  And if you consider yourself strong then you will definitely become stronger.)

स्वामी जी कहते है, इंसान जो सोचता है उसी तरह और उसी दिशा में उसके मन को विकास की प्रक्रिया में लगा देता है। और उसी तरह बन जाता है। अगर इंसान खुद को दूसरों से कमजोर समझता है। तो वह खुद को दूसरों से हमेशा कमज़ोर ही पाता है। और अगर वह खुद को मजबूत और काबिल समझता है तो यकीनन वह इंसान खुद को सबसे मजबूत और सबसे काबिल पाता है। हमारी सोच ही हमारे विचारों को समझकर यह निर्णय लेती है। इसलिए यह बात ध्यान रखने योग्य है। की हमारी काबिलियत पूरी तरह से हमारे सोच पर ही निर्भर करती है।

स्वामी विवेकानंद के विचार
स्वामी विवेकानंद के विचार


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आत्मविश्वास ही एक ऐसी शक्ति है जो इंसान को नीचे से शीर्ष तक पोहोचाने के काबिल बनाती है।

(Self-confidence is the power that makes a person capable of moving from bottom to top.)

आत्मविश्वास याने खुद पर किया जाने वाला भरोसा। स्वामीजी कहते है। जो व्यक्ति खुद पर यकीन करता है, भरोसा करता है वह व्यक्ति हर विपदा से लड़कर अपने लक्ष्य को पाने की हिम्मत रखता है। और यकीनन वह व्यक्ति जीवन के उद्देश को पाने में सफल हो जाता है। इसलिए हमारे अंदर सकारात्मकता से भरे आत्मविश्वास की जरूरत है।

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जीवन में हम वहीं पाते है जो हम बोते है। हम स्वयं ही हमारे भाग्य के निर्माता है।

(In life, we get only what we sow.  We ourselves are the creators of our destiny.)

हमारा भाग्य कोई ओर निर्धारित नहीं कर सकता। हम खुद ही हमारे भाग्यविधाता होते है। स्वामीजी कहते है, भूतकाल या वर्तमान के हमारे कर्म ही हमारे भविष्य में फलित होकर हमें फल देते है। हमारा आचरण ,व्यवहार तथा हमारी सोच जिस तरह से वर्तमान में कर्म को जोड़ती है। उसी तरह के फल हमें भविष्य में मिलते है। चाहे हम अच्छे कर्म करे या बुरे कर्म करे उसका फल हमें उसी के आधार पर मिलेगा। वहीं हमारा भाग्य भी होगा।

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स्वामी विवेकानंद के विचार

अगर आपका व्यक्तित्व सुंदर नहीं तो आपके सूरत का सुंदर होने का कोई मतलब नहीं। क्यो की सुंदर होने और सुंदर दिखने के बीच में बड़ा अंतर होता है।

(If your personality is not beautiful then there is no point in your appearance being beautiful.  There is a big difference between being beautiful and looking beautiful.)

शरीर की सुंदरता नश्वर होती है। जो समय के अंतराल में नष्ट होती है। किन्तु मन की सुंदरता कभी नष्ट नहीं होती वह चिरकाल इस संसार में हमसे जुड़ी होती है। स्वामीजी कहते है मन की सुंदरता को हम जीवन के अंत तक या फिर उसके बाद भी लोगों के दिलों में कायम रख सकते है।  और सिर्फ शरीर की सुंदरता से हम किसी के में को जीत नहीं सकते। जब तक हम मन से सुंदर ना हो।

स्वामी विवेकानंद के विचार
स्वामी विवेकानंद के विचार


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प्रार्थना के लिए जोड़े गए दो हातो की तुलना से किसी की मदद के लिए बढ़ाया गया एक हात अधिक उपयोगी होता है।

(A hand extended to help someone is more useful than a comparison of two hands added to prayer.)

किसी के लिए दुआ मांगना एक अच्छी बात होती है। कोई अगर दुःख या परेशानी में हो तो हमारे मन को उसके प्रती लगाव से हम भगवान से उसकी परेशानियों से उसे छुटकारा मिलने की दिल से कामना करते है। पर यदि हम उसके दुख में उसका साथ देकर उसकी परेशानियों को कम कर सकते है तो वह हमारी दुवाओं से भी काफी महत्वपूर्ण होता है। इसलिए किसी के परेशानी में सिर्फ दुआ ही ना के बल्कि दुआओं के साथ मदद के लिए अपना हाथ भी बढ़ाएं।

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अपने स्वयं के बारे में अज्ञान कि जागरूकता ही ज्ञान का पहला कदम हो सकता है।

(The awareness of one’s own ignorance can be the first step to knowledge.)

क्या हम खुद को पूरी तरह समझते है। अज्ञानी होना यह लज्जास्पद नहीं है। किन्तु हम अज्ञानी होकर भी ज्ञान की डिंगे हाकना यह हमारे खुद के लिए अपमानजनक हो सकता है।  खुद की अज्ञानता जानकर ज्ञान की लालसा रखना और मन से ज्ञान को अर्जित करना ही ज्ञानी होने का पहला कदम होता है। इसलिए ज्ञान साधना का अत्यंत महत्वपूर्ण पैलु है।

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स्वामी विवेकानंद के विचार

खुद को हमेशा विकसित करते रहे, ध्यान रखें गति और वृद्धि  यही जीवन शक्ति के संकेत है।

(Always keep developing yourself, keep in mind that speed and growth are the signs of vitality.)

जीवन को आगे बढ़ाने का ही धेय्य होता है हमारा। और होना भी चाहिए। क्यो की अचल अवस्था को मृतप्राय माना जाता है। अगर हम अपने जीवन की आगे बढ़ने तथा खुद को प्रेरित करने की गति को सीमित कर देते है तो हमारे जीवन के लिए यह अचल अवस्था निर्मित हो जाएगी।  और हमारे जीने और ना जीने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इसलिए हमें जीवन में गतिशील रहना चाहिए। जीवन को आगे बढानके लिए प्रयासरत रहना चाहिए।

स्वामी विवेकानंद के विचार
स्वामी विवेकानंद के विचार


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सच्चाई के खातिर सब कुछ न्योच्छावर कर दो, कुर्बान कर दो। लेकिन किसी के खातिर सच्चाई को खुद से अलग ना करो।कभी भी सच्चाई का रास्ता मत छोड़ो।

(Sacrifice everything for the sake of truth, sacrifice it.  But do not separate the truth from yourself for the sake of anyone. Never leave the path of truth.)

सत्य जीवन का उद्देश्य होना चाहिए। क्यो की सत्य ही जीवन का आधार है।  यदि हम स्वार्थ के लिए सत्य के प्रति मन की दिशाभूल करते है तो हमारा जीवन मिथ्या व्यवहार में फस जाएगा। और हमारे जीवन में नहीं स्थिरता रहेगी और नहीं आनंद। सत्य हमेशा ही जीवन के उद्देश्य की सफलता की पूर्ति करता है। इसलिए हमें सत्य का मार्ग कभी भी नहीं छोड़ना चाहिए।

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जब कोई भी विचार आपके मन में विशेष रूप से आता है तब वह विचार एक वास्तविक, शारीरिक या मानसिक स्थिति में बदलने की क्षमता रखता है।

(When any thought comes specifically to your mind, then that thought has the ability to change into a real, physical or mental state.)

जब हम मन को किसी विचार से निर्धारित करते है तब वह विचार हमारे मन को एकाग्र करता है और फिर वह विचार हमारे जीवन को तथा हमारे अचार विचारों को बदलने का सामर्थ्य रखता है। जो विचार मन को केंद्रित कर सकते है वह विचार हमें शारीरिक और मानसिक तौर पर हमें बदलने की ताकत भी रखते है।

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हमारे मन की शुद्धता, हमारा दृढ़ संकल्प तथा ओर हमारा धैर्य ही हमें अपनी सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।

(The purity of our mind, our determination and our patience is the key to our success.)

हमें अगर सफलता को प्राप्त करना हो तो हमारे मन को दूसरों के प्रति या विचारों के प्रति शुद्ध रखना अनिवार्य होता है। किसी भी बात से मन का कलुषित होना हमारे दोषों को उजागर करता है। इसितरह हमारा दृढ़ संकल्प तथा हमारा धेेय्य हमारे जीवन को सफलता की ओर ले जाता हैं।

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ये मत कहिए कि आप कुछ नहीं कर सकते। आपने असीम क्षमता और अलौकिक शक्तियां मौजूद है। बस उसे पहचाने आप कुछ भी करने की क्षमता रखते है।

(Do not say that you cannot do anything.  You have infinite potential and supernatural powers.  Just recognize that you have the ability to do anything.)

इंसान जन्म से ही असीम शक्तियों तथा विचारों का धनी होता है। किन्तु उसे विकसित होने को वक्त लगता है तथा अपनी शक्तियों का परिचय नहीं होता। इसलिए दुःख को भोगता है। अगर इंसान किसी बात को ठान लें तो वह कुछ भी कर सकता है। बस दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और साहस से इंसान दुनिया को लांघ भी सकता है।

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स्वामी विवेकानंद के विचार हमारे जीवन को हमेशा ही दिशा-निर्देशित करते आए है। हमारे मन के विचारों को एक नई संजीवनी देने का कार्य स्वामी विवेकानंद के विचार करते है। इससे हमें जीवन की कठिनाईयों का सामना करने का बल मिलता है। और हमारे भीतर नई चेतना का संचार होता है। स्वामी विवेकानंद के विचार यदि हम हमारे जीवनयापन में अपनाते है। तो यकीनन जीवन को सफल और बेहतर बना सकते है।

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धन्यवाद


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